25 अक्टूबर 2013

वास्तु शास्त्र का सच----VASTU SHASTRA (Hindi)



वास्तु शास्त्र का सच---------
रेणीक बाफना हस्तरेखाविशेषज्ञ रायपुर (मोबा.98279-43154)

भारत में भेड़चाल की परम्परा बहुत पुरानी है , और भारतीय हजारो वर्ष से इसका आदी रहा है , किसी ने कहा दिया यदि फलां  चीज रखने से घर में धन  वर्षा होती है तो बस अधिकांश लोग देखा देखी  रखना शुरू कर देंगे , चाहे कीमत कुछ भी हो , चाहे धन आये या न आये।  करीब बीस वर्ष पूर्व वास्तु शास्त्र का चलन नहीं था , पर अचानक कुछ लोगो ने पुराने ग्रंथो में कुछ उदाहरण खोजे और  अनेक मूर्धन्य विद्वान पैदा हो गए। अनेक किताबे लिखी गयी , अनेक झूठे सच्चे प्रमाण दिए गए , एक "ऊर्जा " का प्रवाह (नेगेटिव और पॉजिटिव )का सिद्धांत समझाया गया ,जो किसी ने न देखा, न नाप जोख किया जा सका। अनेको ने इसे साइंटिफिक बताया , विज्ञानछाप प्रमाण भी दिए गए।  रहस्य  विध्याओ में मेरी स्वाभाविक रूचि के कारण मेरा भी ध्यान जाना स्वाभाविक था , परन्तु परम्परा के विरुद्ध मेरी रूचि - "पहले सच्चाई परखो फिर मानो " में ज्यादा थी।  मैंने निरिक्षण करना शुरू किया तो दैनिक राशिफल, साप्ताहिक राशिफल जैसी बकवास से ज्यादा नजर नहीं आया। पाठको के समक्ष कुछ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूं।
1 . एक उदाहरण में एक घर में ईशान दिशा में खुली लेट्रिन , पूर्व में पीपल का वृक्ष , जिसकी शाखाएं घर तक आती थी , घर का मुख दक्षिण की और जैसा घोर दोष था , परन्तु उस घर का निवासी नगर सेठ भी बना तथा अथाह धन संपत्ति का स्वामी भी !
2 - एक अन्य उदाहरण में फैक्ट्री का मालिक जिस घर में  रहता था उसमे कुछ वास्तु दोष था , फैक्ट्री की जमीन भी तिकोनी थी , फैक्ट्री चलाने में आर्थिक कष्ट भी चल रहा था।  वास्तु सलाह के अनुसार पहले घर का वास्तु दोष कुछ तोड़ फोड़ कर सुधारा गया , बाद में फैक्ट्री का वास्तु दोष दूर करने एक मंदिर की स्थापना किया गया।  बस परिणाम आ गया।  फैक्ट्री रो धो कर डेढ़ साल चल पायी और बंद करना पड़ गया।
3 - जिस घर में श्वेत आक का पौधा हो वह घर शुभ माना जाता है  और धन संपत्ति से परिपूर्ण होता है , पर निरिक्षण में मैंने पाया कि ऐसा घर प्राय: खँडहर ही रहता है।
4 -नया घर बनवाये तो वास्तु शास्त्र का पालन करने में कोई गुनाह नहीं होता , परन्तु यह जरुरी नहीं सब कुछ अच्छा हो ही होगा।  मैंने प्रयोग के तौर पर एक वास्तु सम्मत घर नया बना कर देखा , परन्तु कोई ख़ास बात या  ख़ास उन्नति  जैसा चमत्कार नहीं देखा जितना बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है।
       दर असल कोई भी विद्वान किताबी ज्ञान वाला होता है कोई  वैज्ञानिक प्रयोग कर्ता या  खोजी नहीं होता।  अत  विद्वानो की भीड़ में खोजी विद्वान  कठिन होता है यदि कोई भाग्य से मिल भी जाए तो उसका संरक्षण चाहिए क्योकि हीरे कम कांच ज्यादा होते है अंधाधुंध किसी सिद्धांत को मानना भी गलत है। अत अनुभवी के अनुभव को महत्व देने के साथ खुद भी आँख कान खुला रखे तो बेहतर होता है मैंने पारद शिवलिंग रुद्राक्ष राशि रत्न पिरामिड आदि अनेक प्रयोग  निरिक्षण कर देखा और भरोसेमंद नहीं पाया।  इसी तरह लाफिंग बुड्ढा यानी हंसते हुए वृद्ध व्यक्ति की मूर्ति आदि चाइनीज वस्तुओ को भी भरोसेमंद नहीं पाया। अनेक नियम जैसे घडी, आइना सम्बन्धी नए नियम भी वास्तु शास्त्र में जुड़े मिलते है  जबकि वास्तु शास्त्र प्राचीन बताया जाता है जबकि इन चीजो का अस्तित्व भी नहीं था।

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