25 अक्टूबर 2013

विज्ञान मानता है पुनर्जन्म सच है ! : SCIENCE ACCEPTS REBIRTH ! (Hindi)

विज्ञान मानता है पुनर्जन्म सच है !
- रेणिक बाफना (98279 -43154 ) , रायपुर(छ ग.) भारत 
चौंक  गए न ? परन्तु यह सच है।  विज्ञान की एक शाखा है मनोविज्ञान , जिसे इतिहास प्रसिद्ध डॉ सिगमंड फ्रायड ने जन्म दिया और अनेक मनोवैज्ञानिको ने विकसित किया , जिसके आधार पर मनोविश्लेषण , मनोचिकित्सा आदि का विकास हुआ।  इसे तो आप विज्ञान की शाखा मानेंगे ? इसी की एक उप-शाखा परामनोविज्ञान विकसित हो रही है , ख़ास कर विदेशो में।  इसी शाखा के अंतर्गत सभी रहस्यमय क्षेत्रो पर वैज्ञानिक अनुसंधान  किये जा रहे है जैसे - उड़न तश्तरी , पुनर्जन्म , आत्मा , ईश्वर का अस्तित्व ,भूत प्रेत ,तंत्र मन्त्र , सूक्ष्म शरीर ,टैली पैथी  इत्यादि। अब वैज्ञानिक मानने लगे है कि पुनर्जन्म सच है।  यह बात अलग है कि विज्ञान का अधकचरा ज्ञान रखने वाले अब भी मूर्खो की तरह कहते है कि -"विज्ञान पुनर्जन्म को नहीं मानता , यह कोरा अंध विश्वास है ". पुनर्जन्म की मान्यताये हर धर्म में है , और हजारो वर्षो से है।  इस बात को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने इसकी सच्चाई जानने प्रयोगो का सिलसिला शुरू किया।  आधुनिक भौतिक साधनो का उपयोग करके इसकी जांच पड़ताल की गयी। अनेक प्रयोगो के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि पुनर्जन्म कोरी कल्पना नहीं वरन एक सच्चाई है।  ब्रिटेन सोवियत संघ , अमेरिका आदि देशो में परामनोविज्ञानिको ने अनेक प्रयोग किये।  भारत इस  क्षेत्र में  कई दशको पीछे है। हालांकि बगैर जाने समझे विद्वता झाड़ने वाले लोगो की कमी नहीं इस देश में। भारत में इने गिने परामनोवैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे है - जैसे ब्यावर (राजस्थान ) के कीर्ति स्वरुप रावत, बैंगलोर के डॉ न्यूटन।  अहमदाबाद के डॉ . एच जाना ने अपने "जरनल " में यह स्वीकार किया कि दो लोगो में पुनर्जन्म की मेमोरी पायी गयी ! (परन्तु पुरानी रिपोर्ट की डिटेल उन्होंने देने में असमर्थता जतायी ). इसके अलावा कुछेक अन्य परामनोवैज्ञानिक भारत में हो सकते है  जो अनुसंधान में लगे है ,परन्तु गुमनाम रहकर शायद वे फिजूल की आलोचनाओ से दूर रहना चाहते हो या फिर अपना हाल महान ऐतिहासिक वैज्ञानिक गैलीलियो की तरह नहीं करना चाहते।
कैसे होती है पुनर्जन्म की खोज :-
वैज्ञानिकगण पुनर्जन्म  की खोज किन विधियों से करते है यह सुधि पाठको को जानना जरुरी है।  कुछ लोगो के साथ अजीब घटनाये होती है जैसे मृत्यु हो जाने के बाद , डाक्टरों के द्वारा मृत घोषित किये जाने के बाद पुन:  जीवित हो उठते है।  ऐसे लोग मृत्यु के बाद होने वाली घटनाओ का वर्णन करते है।  हालाकि ऐसी घटनाएं हजारो में एक के साथ होती है किन्तु अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण ! ऐसी घटनाओ को वैज्ञानिक गहराई से व  तार्किक ढंग से विश्लेषण करते है।  कभी कभी व्यक्ति कुछ दिनों में या उठने के तुरंत बाद भूलने लगता है , ऐसी स्थिति में वैज्ञानिक हिप्नोटिज्म का प्रयोग कर सब याद दिलाते है।  यह पाया गया सभी लोग एक जैसा वर्णन करते है।  इसमे जाति ,क्षेत्र , भाषा ,आदि की भिन्नता होते हुए भी वर्णनों में पायी गयी एक- रूपता एक सच्चाई का संकेत तो देती ही है। डॉ रेमंड  मूडी इस पद्धति के विश्व प्रसिद्द वैज्ञानिक माने जाते है। उन्होंने अपने निष्कर्षो को लाइफ आफटर डेथ नामक पुस्तक में संकलित किया है।  परंतु आलोचक कहते है कि मरते वक्त दिमाग विकृत हो जाता है जिससे भ्रम विभ्रम की स्थिति आती है। 
(बचपन में राजापारा कांकेर में एक जैन महिलाए थी जिसके बारे में कहा जाता था कि वो मरकर पुन: जी उठी थी , जिससे लोग उससे डरने लगे थे , और जीवन भर कांकेर के जैन समाज ने दूरी बनाये रखा !)
                  दूसरी पद्धति में में वैज्ञानिकों ने व्यक्ति को सम्मोहन निंद्रा ( तन्द्रा या योग निंद्रा ) अवस्था में धीरे धीरे बचपन  और फिर जन्म के दौरान , फिर पिछले जन्म की याद दिलाते है।  इस तरह प्राप्त निष्कर्षो की छानबीन की जाती है।  वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग सभी ने जन्म के समय की बाते बताई , जन्म के तुरंत बाद अस्पताल डाक्टरो इत्यादि की बाते या वर्णन जो उसने किया वो सही पाया गया ! इसी तरह पिछले जन्मो के बारे में कही गयी बातो की छानबीन की गयी तो आश्चर्यजनक रूप से सही पायी गई।  डॉ  हेलेन वॉम्बेक इस तरह के प्रयोगो  में विश्वप्रसिद्ध हुई . उन्होंने करीब चार हजार लोगो को पिछले जन्म कि याद दिलाई  और अपने निष्कर्षो को "लाइफ बिफोर लाइफ "नामक किताब में संकलित किया। इस तरह के प्रयोग करने वाले अनेक वैज्ञानिक विदेशो में कार्यरत है।
                             भारत में एक परामनोवैज्ञानिक डॉ प्रीती  जैन ने इमेजिन टी.वी।  पर राज पिछले जन्म का नामक सीरियल के द्वारा प्रस्तुत करने का दुस्साहस किया , परिणामस्वरुप चवन्नी छाप पत्रकारो, अधकचरे विज्ञान- शिक्षितो  की आलोचना का सामना करना पड़ा। एक दुर्जन वकील ने तो न्यालय में अंधविश्वास फैलाने के विरुद्ध दावा ही ठोक दिया। सुधि पाठकगण स्वयं निर्णय करे कि भारतीय जनमानस जो खुद को कितना पढ़ालिखा समझता है  वह कितना पिछड़ा है , दशको पीछे या फिर शताब्दियों पीछे ?

आत्मा का वजा तौला गया -
मरते हुए किसी व्यक्ति को यदि तराजू पर रख दिया जाए और जैसे ही व्यक्ति की मृत्यु हो और शारीर के वजन में कमी हो तो यह वजन आत्मा जैसी किसी चीज का ही होगा। यही प्रयोग वैज्ञानिकों ने किया बार बार . एक ऐसे तराजू का उपयोग किया गया जो एक ग्राम का हजारवा हिसा ठीक ठीक तौल सके।  हर बार एक प्रयोगो में एक छटाक वजन कम होते पाया गया। ! यानी मनुष्य की आत्मा का वजन एक छटाक के लगभग होता पाया गया। (यह रिपोर्ट कई  वर्षो पहले रीडर्स डाइजेस्ट में  छपी थी ). आलोचक पूछते है क्या चींटी की आत्मा का वजन भी यही होगा ? और हाथी का ? जवाब बुद्धिमान पाठक भी स्वयं दे सकते है।  कि प्रयोग मरते हुए मनुष्य पर किया गया था न कि हाथी और चींटी पर !
सूक्ष्म शरीर को परखा गया -
वैज्ञानिकों ने एक ऐसे कमरे का उपयोग किया जिसमे प्रकाश की एक किरण भी न जा सके . अंदर अनेक भौतिक यंत्र लगाए गए जो प्रकाश का एक  भी कण (फोटोन ) की उपस्थिति भी बता सके।  अब उन्होंने कमरे के अंदर कुछ वस्तुए अलग अलग स्थानो पर चिपकाए दिए  जिसकी जानकारी बेहद गुप्त रखी गयी . फिर एक व्यक्ति को गहन तन्द्रा में ले जाकर सूक्ष्म शरीर की यात्रा कराई गयी (अंग्रेजी में इसे क्लेरवायेंस/clairvoyace कहते है ). आश्चयर्जनक रूप से गहन तन्द्रा में व्यक्ति ने उस घुप अँधेरे में रखे वस्तुओ का स्थान ठीक ठीक बता दिया ! जबकि शारीरिक रूप से व्यक्ति उस उस कमरे से दूर था ! उधर संवेदनशील उपकरणों ने थी उसी समय कमरे में फोटोंन  कण (प्रकाश कण ) की उपस्थिति दर्शायी , कमरे में इधर उधर घूमते हुए ! (यह रिपोर्ट भी की वर्षो पहले रीडर्स डाइजेस्ट में छपी थी )
एक नयी जानकारी पेश करता हूं -हिस्टरी चैनल में अनसील्ड  फ़ाइल नामक सीरियल चल रहा है , यह देखने
 लायक है , इसके अनुसार ब्रम्हांड  दूसरे ग्रहों से प्राणी हजारो वर्षो से पृथ्वी पर आते रहे है . इसका मतलब  "देवता" हो सकते है . मेरा भी काफी पहले से अनुमान था  धरती पर मनुष्य जाति किसी दूसरे ग्रह से आरोपित किया गया हो , क्योकि डायनासोर जैसे प्राणियों से कोई साम्यता दिखाई नहीं देती। 

"   मूर्ख   सत्य का एक ही अंग देखता है , विद्वान सत्य के सौ अंगो को देखता है  "   -थेर गाथा

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