तंत्र कुछ जाने लायक कुछ बाते :-
आये दिन समाचारों में वीभत्स घटनाए पढने को मिलती है मसलन टोनही के संदेह में कथित महिला से मारपीट एवं ह्त्या अथवा जादू टोने के संदेह में हत्या का प्रयास। यहाँ पाठको को स्पष्ट करना चाहुंगा, अनेक ऐसे देवी आने इत्यादि देव स्थानों का मैंने परीक्षण किया और पाया की ये विश्वसनीय नही होते। अव्वल तो किसी बैगा गुनिया द्वारा बतायी गयी बाते सच्ची नही होती। क्रास चेक करने पर गलत निकलती है - यदि कोई बात सत्य भी मिली तो ऐसी दुष्टता का जवाब भी उसी पद्धति से दिया जाना चाहिए न की सीधे आमने सामने लड़कर, यही तरीका सुरक्षित रहता है
| आदरणीय डौंडी वाले सर ,डौंडी,जिला-दुर्ग (छ.ग.)9907464636 |
1-मन्त्र जिसमे कुछ विशिष्ट अक्षरों व लाइनों को बार बार दुहराया जाता है.
2-तंत्र जिसमें भौतिक वस्तुओ का प्रयोग किया जाता है , पूजन आदि के लिए।
3- यंत्र जिसमे आडी तिरछी रेखाओं की आकृति , अंक आदि का प्रयोग होता है.
इन विद्याओं के जानकार मान्त्रिक, तांत्रिक और यांत्रिक कहलायेंगे , परन्तु इन्हें सामान्यत: तांत्रिक ही कहा जाता है.
कई प्रक्रियाओं में मन्त्र व तंत्र का सम्मलित प्रयोग होता है. इन तांत्रिक क्रियाओं में अजीबो गरीब वस्तुओ से लेकर साधारण वस्तुए भी प्रयोग में लाई जाती है. यह तांत्रिक पर निर्भर करता है।
इन प्रयोगों का असर कभी तो तत्काल दिखाई देते है कभी २४ या ७२ घंटे में , कभी एक महीने या तीन महीने की अवधि में. अत: धीरज रखना चाहिए। पीड़ा निवारण , शारीरिक , मानसिक परेशानी निवारण प्राय: तत्काल और कम अवधि में फल दायक होते है. पुरानी परेशानी की दिन का समय ले सकती है। समृद्धिकारक प्रयोग की महीने में फल देते है.
जैसे डाक्टर की दवाईयाँ सफल ,असफल या लंबा समय लेती है जिसके कारण प्राय: दवाईयाँ भी बदली जाती है वैसे ही ये अध्यात्मिक प्रयोग सफल, असफल या लंबा समय ले सकती है. दूसरो का भला करने वाला तांत्रिक ऐसा करते समय, दूसरो के कष्ट का स्वयं शिकार भी बन जाता है , अत: खतरा भी रहता है. ये लम्बे समय के निरिक्षण , ध्यान व प्रयोगों में मैंने देखा है। दैवी तंत्र तो इश्वर की अराधना ही है, अत: लगभग हर तंत्र साधक या दैवी उपासक, शक्ति संपन्न होता है, परंतु दूसरो के भले का साहस नही करता , दुष्परिणाम से बचने के लिए।
एक प्रश्न और उठता है। कईयो के कार्य अनेक चक्करो के बाद भी क्यों नहीं होते। मैंने भी देखा है कि जहां मेरे कार्य कई चक्करो के बाद अंतत: पुरे हुए,वहीं अनेक लोग 20 वर्षो तक भटकने के बाद भी कुछ नहीं हो पाया। कारण निम्न दिखता है-
1- चूँकि कार्य तो दैवी शक्ति संपन्न करती है,साधक तो केवल माध्यम होता है। दैवी शक्ति व्यक्ति के अहंकार,पापकर्म आदि को भली भाँती जानती है अत: वह इनकार कर देती है।
2-साधक भी जानजाता है कि अमुक व्यक्ति घमण्डी स्वार्थी और पापी है इसलिए दैवी इच्छा का सम्मान करते हुए टाल देता है।
अत: कर्म साफ़ रखिये,पुण्यात्मा रहिये तभी दैवी शक्ति प्रसन्न रहती है और सहायता को तत्पर रहती है।
ज्ञान के लिए निम्न साइट पढने का अनुरोध करता हूँ , क्योकि परामनोविज्ञान सत्य की ही खोज के लिए ही बना है . "Sai Baba Charitra "Exposed
यदि कठनाई जाए तो निम्न एड्रेस पर देखा जा सकता है।
http://www.vedicbharat.com/2013/04/Shirdi-sai-baba-Exposed---must-read.html
ज्ञान के लिए निम्न साइट पढने का अनुरोध करता हूँ , क्योकि परामनोविज्ञान सत्य की ही खोज के लिए ही बना है . "Sai Baba Charitra "Exposed
यदि कठनाई जाए तो निम्न एड्रेस पर देखा जा सकता है।
http://www.vedicbharat.com/2013/04/Shirdi-sai-baba-Exposed---must-read.html
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