("ऐसा भी होता है"- के सन्दर्भ में )
मेरे लेखो के बाद कुछ लोगो ने मुझसे संपर्क करने की कोशिस भी की,कुछ तो सफल भी हुए,कुछ को कांटेक्ट नं नहीं मिल पाया। मैं खुद ही नहीं चाहता कि इतने बड़े देश के लाखो लोग मुझे फोन करके परेशान करे।मेरा सिर्फ इतना उद्देश्य है कि लोगो को सच्चाई से अवगत कराऊ,पर इस तरह की परेशानियों से निपटने का रास्ता स्वयं उन्हें ही खोजना पडेगा।
एक परेशानी हमेशा लोगो को रहती है खासकर मध्यम वर्ग के लोगो को,जो इस क्षेत्र में असली नकली की पहचान में सक्षम नहीं होते।
ज्योतिष और मन्त्र-तंत्र जैसे क्षेत्र ठगी,पाखण्डियों का बहुत बड़ा व्यापार बना हुआ है।
कोई नज़र उतारने का सामान बेचता है वो भी टीवी ,इंटरनेट के जरिये। जैसा कि हर धंधे में होता है वैसा ही इस क्षेत्र में होना कोई आश्चर्य की बात नहीं।इसलिए सावधानी जरुरी है।एक चीज और,कोई भी यंत्र केवल पूजा स्थल पर पड़ा रहे तो वो अपने आप काम नहीं करता।ये मेरा अपना अनुभव है।
कुछ टिप्स दे रहा हूँ सावधानी के लिए ,बुद्धि आपको ही लगानी पड़ेगी।
1-ये सच है कि पहले लोग साधना करते थे और रोजी रोटी कमाना नहीं पड़ता था। ये लोग सेवा करते थे।राजाओं के जमाने में।उस काल में राजाओ द्वारा और खुद जनता द्वारा दक्षिणा आदि दे दिया जाता था कि उन्हें रोजी रोटी की चिंता ही नहीं करनी पड़ती थी। आज इस क्षेत्र में रहने वाले भूखो मरेंगे अत: रूचि रखने वाले,योग्यता रखने वाले मज़बूरी के चलते इस क्षेत्र से दूर ही रहना पसंद करेंगे।
2-साधक लोग गैर-सांसारिक और अंतर्मुखी होते है प्रायः,इसलिए लोगो से दूर रहना पसंद करते है। फिर ऐसे लोग विज्ञापन करना क्यों पसंद करेंगे ?
अखबारो में विज्ञापन धन्धेबाजो और धूर्तो के ही आते है।इनसे दूर रहना ही अच्छा। कुछ ठग गिरोह भी देखे जाते है,जिनके चक्कर में फंस कर लाखो रु की ठगी का शिकार लोग हो जाते है।
3-जो व्यक्ति भूत प्रेत निवारण के लिए,टोना टोटका निवारण के लिए आपके सोना चाँदी या गहनों की मांग करे, वो आपसे ठगी ही कर रहे है।
4-ये ठीक है कि आज के जमाने में साधू संतो को भी धन की आवश्यकता होती है क्योकि दान दक्षिणा का ज़माना बीत चुका। दान भी जहाँ जाना चाहिए उसकी बजाय अनावश्यक स्थानों में जाता दिखता है। कुछ ही लोग ऐसे होते है जो निशुल्क सेवा करते है क्योकि उनके जीवन यापन का श्रोत कोई और होता है। पर दक्षिणा के नाम पर ठगने या सोना चांदी गहने की ठगी नहीं करते क्योकि ये पुण्यात्मा होते है।
5-असली साधक/सिद्धि प्राप्त व्यक्ति दिखावे से दूर रहता है। जो लोग ढेर सारा तिलक चन्दन,गले में नाना प्रकार की मालाये,हाथो में तरह2 की अंगूठियां , प्रायः अजीबो गरीब वस्त्र आदि धारण किये हुए होते है वे प्रायः ठग/धूर्त ही होते है।
अनेक बार यह भी देखने मिला कि कईयो के कार्य अनेक वर्षो के बाद भी पूरे नहीं हो पाते। ऐसा क्यों?
दरअसल कर्ता तो दैवी शक्ति/उच्च शक्ति ही होती है। और उन्हें आपका कच्चा चिट्ठा भलीभांति मालुम रहता है। अहंकारी,पापी, दुष्टात्मा देखकर वे कार्य को टालते जाते है। साधक भी यह बात जान जाता है अत: टालने लगता है। अत: इन दुर्गुणो से दूर रहे,दैवी शक्ति प्रसन्नतापूर्वक सहायता को तत्पर रहेगी,थोड़ी सी पूजा से ही प्रसन्न हो कार्य संपन्न कर देती है
कर्ता केवल देवी देवता होते है,न कि पुजारी/साधक। वह तो केवल माध्यम होता है। केवल दिया अगरबत्ती जला देता है,फूल इत्यादि अर्पित कर देता है। परिणाम तो उच्च शक्तिया देती है।अत:गारंटी के साथ कार्य सिद्ध करने का दावा करने वाले लोग ठग होते है।
कभी वांछित दक्षिणा न मिलने की उम्मीद में भी साधक कार्य करने से इनकार कर देते है। दक्षिणा/फ़ीस उनका अधिकार होता है। अत: साधक(तांत्रिक/देवी सेवक) को उचित पारिश्रमिक देना ही चाहिए। तभी कार्य पूर्ण होते है।