मैं ज्योतिष पर क्यों विश्वास करने लगा
मेरे एक मामाजी थे जो प्रसिद्द वकील होने के साथसाथ हस्तरेखा विशषज्ञ भी थे . उन दिनों मेरी उम्र २४-२५ वर्ष रही होगी। तब तक ज्योतिष विद्या में मुझे विश्वास पक्का नहीं था .
[ पर एक घटना हो चुकी थी , एक होमियोपैथी के डाक्टर ने मेरी कुंडली देखकर बता दिया था कि तुम ज्यादा नहीं पढ़ पाओगे , सिर्फ ग्रेजुएशन तक ही पढ़ पाओगे। मैंने उसे चुनौती के रूप में लिया और ग्रेजुएशन के बाद आगे सी. ए. करने चला गया। जो पांच साल पापड़ बेलने के बाद भी वाकई नहीं कर पाया। ]
मैंने मामाजी को अपना हाथ दिखाया तो उन्होंने कहा कि २८ वे वर्ष में तुम्हारा खुद का कार्य शुरू होगा। वाकई मेरा खुद का कार्य २८ वे वर्ष में ही शुरू हुआ , उसके पहले मैं आत्मनिर्भर नही हो पाया, मैंने पूछा कि हस्तरेखा तो अंधविश्वास है , बकवास है कइयो का अनुभव है कि गलत होता है वगैरह । तो उन्होंने कहा , एकदम सत्य होती है , मैंने तर्क किया कि मैंने कुछ किताबे देखी थी, कभी लोगो को पढते , तो उन्होंने जवाब दिया तुमने अब तक बाजारू किताबे ही देखी है जो पैसा कमाने के लिए लिखी गयी होती है , असली किताबे इतनी सस्ती थोड़ी मिलती है ! अब भविष्यवाणी सत्य होते देखकर मेरी उत्सुकता और बढ गयी , मैं फिर गया , पूछने पर उन्होंने आगे की बात बतायी। इसके बाद चूँकि सत्यता का प्रमाण मुझे मिल गया तो मैंने लेखक आदि का नाम पूछ कर अपने गृह नगर लौटा , और संयोग से श्री नवाब अली , जो मेरे मोहल्ले में ही रहते थे, के पास मिल गयी। किसी को किताब नहीं देने की आदत के बाद भी उदारता पूर्वक उन्होंने मुझे पढने दी , मार्गदर्शन भी किया समय समय पर और इस तरह मुझे ये विद्या प्राप्त हो गयी।
मेरे एक मामाजी थे जो प्रसिद्द वकील होने के साथसाथ हस्तरेखा विशषज्ञ भी थे . उन दिनों मेरी उम्र २४-२५ वर्ष रही होगी। तब तक ज्योतिष विद्या में मुझे विश्वास पक्का नहीं था .
[ पर एक घटना हो चुकी थी , एक होमियोपैथी के डाक्टर ने मेरी कुंडली देखकर बता दिया था कि तुम ज्यादा नहीं पढ़ पाओगे , सिर्फ ग्रेजुएशन तक ही पढ़ पाओगे। मैंने उसे चुनौती के रूप में लिया और ग्रेजुएशन के बाद आगे सी. ए. करने चला गया। जो पांच साल पापड़ बेलने के बाद भी वाकई नहीं कर पाया। ]
मैंने मामाजी को अपना हाथ दिखाया तो उन्होंने कहा कि २८ वे वर्ष में तुम्हारा खुद का कार्य शुरू होगा। वाकई मेरा खुद का कार्य २८ वे वर्ष में ही शुरू हुआ , उसके पहले मैं आत्मनिर्भर नही हो पाया, मैंने पूछा कि हस्तरेखा तो अंधविश्वास है , बकवास है कइयो का अनुभव है कि गलत होता है वगैरह । तो उन्होंने कहा , एकदम सत्य होती है , मैंने तर्क किया कि मैंने कुछ किताबे देखी थी, कभी लोगो को पढते , तो उन्होंने जवाब दिया तुमने अब तक बाजारू किताबे ही देखी है जो पैसा कमाने के लिए लिखी गयी होती है , असली किताबे इतनी सस्ती थोड़ी मिलती है ! अब भविष्यवाणी सत्य होते देखकर मेरी उत्सुकता और बढ गयी , मैं फिर गया , पूछने पर उन्होंने आगे की बात बतायी। इसके बाद चूँकि सत्यता का प्रमाण मुझे मिल गया तो मैंने लेखक आदि का नाम पूछ कर अपने गृह नगर लौटा , और संयोग से श्री नवाब अली , जो मेरे मोहल्ले में ही रहते थे, के पास मिल गयी। किसी को किताब नहीं देने की आदत के बाद भी उदारता पूर्वक उन्होंने मुझे पढने दी , मार्गदर्शन भी किया समय समय पर और इस तरह मुझे ये विद्या प्राप्त हो गयी।