कमी कहां है ?
-रेणिक बाफना (हस्तरेखाविद,रायपुर)
मो. 98279 -43154
कभी कभी किसी व्यक्ति को जीवन में संघर्ष ही संघर्ष झेलना पडता है. सारा जीवन संघर्ष में निकल जाता है समझ में नहीं आता कि जहाँ सारे दूसरे लोग मेहनत से दिन ब दिन उन्नति करते जा रहे है वही आपकी स्वयं तमाम कोशिशो के बाद भी रास्ता नहीं सूझता। ऐसे में व्यक्ति कभी साधुओ , कभी बाबाओं , कभी तांत्रिकों और कभी ज्योतिषियों के पीछे घूमता नजर आता है। आइये सारे खोज बीन के पश्चात कारण- सार प्रस्तुत है लोक कल्याण के लिए -
१-स्वयं का भाग्य - अगर मुसीबतो से छुटकारा नहीं मिल रहा है तो स्वयं का भाग्य दिखाए। हो सकता है खुद का समय खराब चल रहा हो. जिससे सफलता मिलने का नाम ही नहीं लेती या रास्ता ही नहीं मिलता। यह भी देखना चाहिए कि सारा जीवन /समय यूं ही रहेगा या कुछ समय ही ऐसा रहेगा , ताकि अनुकूल समय की प्रतीक्षा की जा सके ,
-रेणिक बाफना (हस्तरेखाविद,रायपुर)
मो. 98279 -43154
कभी कभी किसी व्यक्ति को जीवन में संघर्ष ही संघर्ष झेलना पडता है. सारा जीवन संघर्ष में निकल जाता है समझ में नहीं आता कि जहाँ सारे दूसरे लोग मेहनत से दिन ब दिन उन्नति करते जा रहे है वही आपकी स्वयं तमाम कोशिशो के बाद भी रास्ता नहीं सूझता। ऐसे में व्यक्ति कभी साधुओ , कभी बाबाओं , कभी तांत्रिकों और कभी ज्योतिषियों के पीछे घूमता नजर आता है। आइये सारे खोज बीन के पश्चात कारण- सार प्रस्तुत है लोक कल्याण के लिए -
१-स्वयं का भाग्य - अगर मुसीबतो से छुटकारा नहीं मिल रहा है तो स्वयं का भाग्य दिखाए। हो सकता है खुद का समय खराब चल रहा हो. जिससे सफलता मिलने का नाम ही नहीं लेती या रास्ता ही नहीं मिलता। यह भी देखना चाहिए कि सारा जीवन /समय यूं ही रहेगा या कुछ समय ही ऐसा रहेगा , ताकि अनुकूल समय की प्रतीक्षा की जा सके ,
"इसमे यह भी देखना चाहिए कि किया गया कार्य अनुकूल भी है या नहीं !"
कभी कभी स्वयं या घर पर या कार्य स्थल पर टोना टोटका जैसे बाधाओं को भी कारण के रूप में देखा गया है। जिसके कारण गंभीर संकट भी उपस्थित हो जाते है। व्यक्ति मेहनत करता रहता है या फिर वास्तु प्रयोगो को आजमाता रहता है पर कोई फर्क नहीं पड़ ता इससे छुटकारा पाने हेतु किसी सही तांत्रिक द्वारा निवारण प्रयोग ही परेशानी दूर कर पाता है।
इन बातों को लोग अंधविश्वास भी कह डालते है पर ऐसे "वैज्ञानिक सोंच" वाले भी स्वयं आस्तिक होते है और ईश्वर के अस्तित्व पर विशवास रखते हुए धार्मिक रीती रिवाजो का पालन करते देखे जाते है। दिन को जनता के सामने "नास्तिक/आधुनिक सोंच वाले" और शाम को नारियल अगरबत्ती लेकर मंदिर की और या अँधेरे में किसी बाबा के पास ऐसे लोग देखे जा सकते है।
२- दूकान, संस्थान के स्थान का अभिशप्त होना -
घर की तरह दूकान संस्थान का स्थान भी अभिशप्त हो जाने से लक्ष्मी का आगमन नहीं होता,दरिद्रता दूर ही नहीं होती, अत: दूकान स्थान की शुद्धता , पवित्रता की भी जांच करवानी चाहिए। तांत्रिक जांच और बंधन भी करवा लेना चाहिए
घर की तरह दूकान संस्थान का स्थान भी अभिशप्त हो जाने से लक्ष्मी का आगमन नहीं होता,दरिद्रता दूर ही नहीं होती, अत: दूकान स्थान की शुद्धता , पवित्रता की भी जांच करवानी चाहिए। तांत्रिक जांच और बंधन भी करवा लेना चाहिए
३-काम धंधे का अनुकूल न होना -
कभी कभी काम धंधे का क्षेत्र ग्रहो के प्रतिकूल होता है , सीधा साधा सिद्धांत है जो व्यक्ति जिस मिट्टी का बना है या जिसे जिस काम के लिए ऊपर वाले ने गढ़ा है , वही कार्य उसे सन्तुष्टि देंगे। यह कुछ हद तक कुंडली ज्योतिष तथा हस्तरेखा से भी जाना जा सकता है। पर इन क्षेत्रों में एक्सपर्ट लोग बहुत कम है। कभी कभी प्रतिकूल कार्य भी असफलता , संघर्ष को जन्म देता है . ऐसे में धंधे में परिवर्तन या धंधे के मालिक के नाम में परिवर्तन या कार्य स्थल का नाम परिवर्तन लाभदायक होता है।
कभी कभी काम धंधे का क्षेत्र ग्रहो के प्रतिकूल होता है , सीधा साधा सिद्धांत है जो व्यक्ति जिस मिट्टी का बना है या जिसे जिस काम के लिए ऊपर वाले ने गढ़ा है , वही कार्य उसे सन्तुष्टि देंगे। यह कुछ हद तक कुंडली ज्योतिष तथा हस्तरेखा से भी जाना जा सकता है। पर इन क्षेत्रों में एक्सपर्ट लोग बहुत कम है। कभी कभी प्रतिकूल कार्य भी असफलता , संघर्ष को जन्म देता है . ऐसे में धंधे में परिवर्तन या धंधे के मालिक के नाम में परिवर्तन या कार्य स्थल का नाम परिवर्तन लाभदायक होता है।
4 -घर का अभिशप्त होना -
कभी कभी निवास स्थान के अभिशप्त होने से सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है , गरीबी लगातार बनी रहती है अत: घर की पवित्रता या शुद्धता की जांच भी करवा लेना चाहिए। वास्तु या फिर तान्त्रिक जांच भी योग्य व्यक्तियो से करवाना चाहिए। ऐसे घरो में लगातार गरीबी, बीमारियो , कलह आदि लक्षण पाये जाते है.
कभी कभी निवास स्थान के अभिशप्त होने से सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है , गरीबी लगातार बनी रहती है अत: घर की पवित्रता या शुद्धता की जांच भी करवा लेना चाहिए। वास्तु या फिर तान्त्रिक जांच भी योग्य व्यक्तियो से करवाना चाहिए। ऐसे घरो में लगातार गरीबी, बीमारियो , कलह आदि लक्षण पाये जाते है.
5- उच्च शक्तियों की अप्रसन्नता -
कभी कभी उच्च शक्तियां जैसे पितर जी या कुलदेवी के रुष्ट होने सेभी गरीबी बिमारी या फिर संघर्ष ख़त्म नहीं होता , अत: ऐसी बातो के प्रति भी सावधानी से जांच सुयोग्य व्यक्तियो से करवाना चाहिए और उच्च शक्तियो की प्रसन्नता के लिए भी प्रयास किये जाने चाहिए। हालांकि विश्वास तो नहीं होता होगा पर यह सत्य है
कभी कभी उच्च शक्तियां जैसे पितर जी या कुलदेवी के रुष्ट होने सेभी गरीबी बिमारी या फिर संघर्ष ख़त्म नहीं होता , अत: ऐसी बातो के प्रति भी सावधानी से जांच सुयोग्य व्यक्तियो से करवाना चाहिए और उच्च शक्तियो की प्रसन्नता के लिए भी प्रयास किये जाने चाहिए। हालांकि विश्वास तो नहीं होता होगा पर यह सत्य है
"याद रखिये कुलदेवी या कुलदेवता के नाराज होने से अन्य देवी देवता भी एक सीमा तक ही भला कर पाते है" ।
6 तंत्र सम्बन्धी बाधाये -कभी कभी स्वयं या घर पर या कार्य स्थल पर टोना टोटका जैसे बाधाओं को भी कारण के रूप में देखा गया है। जिसके कारण गंभीर संकट भी उपस्थित हो जाते है। व्यक्ति मेहनत करता रहता है या फिर वास्तु प्रयोगो को आजमाता रहता है पर कोई फर्क नहीं पड़ ता इससे छुटकारा पाने हेतु किसी सही तांत्रिक द्वारा निवारण प्रयोग ही परेशानी दूर कर पाता है।
इन बातों को लोग अंधविश्वास भी कह डालते है पर ऐसे "वैज्ञानिक सोंच" वाले भी स्वयं आस्तिक होते है और ईश्वर के अस्तित्व पर विशवास रखते हुए धार्मिक रीती रिवाजो का पालन करते देखे जाते है। दिन को जनता के सामने "नास्तिक/आधुनिक सोंच वाले" और शाम को नारियल अगरबत्ती लेकर मंदिर की और या अँधेरे में किसी बाबा के पास ऐसे लोग देखे जा सकते है।