मेरा परिचय -
आऱ के. बाफना ,हस्तरेखा विशेषज्ञ , (शौकिया ) (94063-00401)
मै , आर के बाफना, कालेज लाइफ से भी पहले हस्तरेखा विद्या को एक मजाक का विषय मानकर मजा लेता था और मजाक के तौर पर मित्रो रिश्तेदारो को सामान्य बाते बताता रहा था विद्वान् होने का ढोग करके -
१- जैसे तुम बहुत अच्छे हो , सबका भला चाहते हो पर तुम्हारे साथ लोग बुरा ही करते है (हर व्यक्ति अपनी नजर में अच्छा ही होता है ! ) ,
२- तुम्हारे पास पैसा आयेगा पर टिकेगा नहीं ( भला पैसा टिकने की चीज है? )
३- आप बहुत समझदार है पर आपकी कोई कद्र नहीं करता
४- युवा हो तो - आप किसी को बहुत चाहते हो ....... आदि आदि
एक बार अपनी मामी जी को हाथ देखकर बताने का ढोग किया तो वो रो भी पड़ी , जबकि उस समय देखना आता ही नहीं था !
लगभग 1989 से इसकी सत्यता का प्रमाण मिलने बाद गम्भीर रूप से और जिज्ञासावश अध्ययन और प्रयोग करने लगा , यह जानने के लिए क्या यह वाकई सच है ! या महज अंधविश्वास !
सच जाने के बाद इसका उपयोग मित्रो , जानपहचान के लोगो तथा रिश्तेदारो को मार्गदर्शन देने में उपयोग करने लगा , बाद में उन्ही की सुझावो पर नौकरी से बचे समय पर आम लोगो को मार्गदर्शन देने लगा जिससे हजारो लोगो को लाभ मिला . हस्तरेखा के गहन अध्ययन के लिए पश्चिमी लेखको के अंग्रेजी में लिखित हजारो रुपयो की किताबे खरीदी ( हमारे देश के लेखक धूर्त है केवल अनुवाद करके खुद की कृति बताते है ) और अध्ध्यन किया एवं प्रयोग करता रहा । परम्परागत ज्योतिषियों को सामान्यतया अंग्रेजी भाषा का ज्ञान न होने से तथा खोजी प्रवृत्ति (रिसर्चर ) न होने के कारण लोगो को उचित मार्गदर्शन नहीं मिलपाता और ठगी के शिकार भी हो जाते है , एक समय बाद इन चीजो से विशवास भी उठ जाता है।
हस्तरेखा ज्योतिष वास्तव में भारतीय ऋषि मुनियो ने मनुष्य कल्याण के लिए ही रचना की। जैन संत शांतिविजय जी ने हस्त-सामुद्रिक शास्त्र की रचना की , परन्तु भारतीयो के विशेष वर्ग ने स्वार्थवश छुपाने व कपटवश विकृत किये जाने से नष्ट भ्रष्ट हो गयी। परन्तु भला हो विदेशी विद्वानो का जिन्होंने सारा जीवन इस खोज में खपा दिया और मिश्र, डचो , अरबियों एवं भारतीयो से इकट्ठा कर , परीक्षण कर दुनिया के सामने प्रस्तुत कर दिया , ये विद्वान् अंगरेज , अमेरिकन, फ्रांसीसी आदि देशो के थे। आज भी अनेक भारतीय विद्याएँ कपटी ,धूर्त , भारतीय लोगो के हाथो नष्ट भ्रष्ट हो रही है।
(मैंने दो ब्राम्हणो को देखा जिनके पास ख़ास विद्याएँ थी , मैंने परीक्षा की थी ,परन्तु एक ब्राम्हण किसी को देना नहीं चाहता था सिर्फ़ इसलिए कि मै उसके परिवार का नहीं जबकि उसका कोई पुत्र भी नहीं था,
दूसरा इसलिए नहीं दिया क्योकि उसे धन का लालच था , जबकि उसके तीन पुत्रो में एक भी विद्याग्रहण के लायक नहीं था , तिस पर उसने वह विद्या एक गोंड जाति के व्यक्ति से सीखा था ! दोनों ब्राम्हणो की मृत्यु के साथ विद्या भी चली गयी आगे किसी के पास नहीं जा सकी , नहीं तो मेरे जैसा सुपात्र सामने होने से मुझे मिल जाता और सैकड़ों का भला होता।)
आर के बाफना यानी मै हस्तरेखा के साथ परामनोविज्ञान आदि में रूचि के चलते अन्य बाते भी सीखा और सैकड़ो लोगो का उद्धार भी किया। एकाउंट मैनेजर के रूप में अनेक इंडस्ट्रीज में कार्य करते हुए , अपने शौक से सीखी हुई विद्याओ का उपयोग , पिछले कुछ वर्षो से , नौकरी से बचा समय निकालकर करना शुरू किया ताकि लोगो का कुछ तो भला हो साथ ही साथ सीखे ज्ञान का सदुपयोग भी हो सके। शुरूआती दिनों में कुछ परेशानियो जैसे नींद में चीखना चिल्लाना (बहन का ), एवं घर से भाग जाने की इच्छा /बिमारी (अपने खेत के नौकर के पुत्र की ) को हिप्नोटिज्म से ठीक किया (ये प्रयोग मैंने सन 1984 में किये थे )। इसीतरह हस्तरेखा से भविष्य दर्शन तथा जीवन के कष्टो में कमी करने के रास्ते खोजकर मार्गदर्शन दिया।
मेरे अध्ययन :- मैंने हायर सेकेंडरी तक विज्ञान (गणित), ग्रेजुएशन में कामर्स , फिर सी ए ( इंटर) तक की पढ़ाई की। शौक से मनो विज्ञान , असामान्य मनोविज्ञान , मन्त्र विद्या , परा मनो विज्ञान , शिव पुराण ,भागवत पुराण ,गीता ,रामायण आदि पढ़ा। शौक से बाइबिल, कुरआन , गुरुग्रंथ के अंश भी पढ़े। होमिओपैथी और नास्त्रेदेमस की भविष्यवाणिया भी पढ़ी।
ब्लाग जगत में मैं क्यों आया ? इसकेपीछे एक कारण है , मैं लेख लिखता रहता था , अनेक अखबारो में मेरे व्यंग आदि प्रकाशित हुए , और मजा भी आया , अनेक लोग मेरे गृह नगर में मुझे पहचानने लगे। पर सन्तुष्टि नहीं मिली। इसी बीच अनेक वर्ष बीत गए . लेख लिखना बंद था परन्तु जीवन में ईश्वर की इच्छा से बहुत कुछ देखना था , वो देखना पड़ा। फिर मेरे मन में - अपने अनुभवो को बांटा जाए , ताकि नयी पीढ़ी के काम आये , अनेको का भला हो , भटकाव कम हो। इसलिए मेरे संस्मरण मैंने , और मेरे पुराने लेख अब ब्लॉग के जरिये प्रस्तुत कर रहा हूँ। In Search of TRUTH परामनोविज्ञान विषयक है जिसमे अजीबो गरीब घटनाओ का विवरण है जबकि MERE VICHAR में व्यंग , लेख , व्यक्ति परिचय ,असाध्य रोग जैसे विषयो पर है। पढ़े- renikbafna.blogspot.com पर।
renikjain@blogspot.com
अपना संपर्क सूत्र हालांकि दे रहा हूँ क्योकि मेरे ब्लॉग जहा हजारो लोग पढ़ेंगे, फिर संपर्क भी करना चाहेंगे। उनसे संपर्क रख पाना, समस्याएं सुनना, रास्ता बताना संभव नहीं। निवारण करना भी संभव नही। अपने कार्य में बाधा उत्पन्न होगी। आखिर गृहस्थ हूँ मैं।