भूतनी मोटर साइकिल में पीछे बैठ गयी थी ! !
ये घटना तो मेरे घर की ही है, मेरे बड़े भाई साहब जो ठेकेदारी करते थे , और गाँव का खेती वगैरह भी देख रेख किया करते थे . हैम लोग स्कुल में पढते थे। ग्राम माटवाड़ा आने जाने के रास्ते में पंडरीपानी नामक गाँव पडता था जो कांकेर से २- कि मी लगभग दूर था। अब तो बस्ती काफ़ी बस गयी।, पहले काफ़ी सुनसान रहता था। रास्ते में शमशान भी पडता था और मुस्लिम कब्रिस्तान भी। एक बार काफ़ी रात को अपनी मोटर साइकिल से ,माटवाड़ा से आ रहे थे कि पण्डरीपानी पार करने के बाद सड़क पर एक सफ़ेद वस्त्र पहने एक महिलाए मिली , और रुकने का इशारा किया , लिफ्ट देने को कहा। परन्तु इतनी रात गए किसी महिला को लिफ्ट कैसे दे देते ? सो सरपट मोटर साइकिल भगाते गए। परन्तु शीध्र ही उन्हे पता चल गया कि वह महिला उनके मोटर साइकिल पर पीछे बैठ गयी है और उनके कंधो पर भी हाथ रखा दी है। दर कर वे मोटर साइकिल चलाते रहे और जैसे की कांकेर की सीमा में पहुंचे वह महिला जाने कहां गायब हो गयी तब घर पहुँचते पहुंचते समझ में आ गया कि कोई भटकती आत्मा/भूतनी थी। घर आकर पूरी घटना बताया।
मेरे बड़े साहब का स्वर्गवास ३ मार्च सन 1992 को हो गया। इसके पीछे भी एक भयानक कहानी से मुझे आमना सामना हुआ , और एक भयानक घटना से मुझे स्वयं को जूझना पड़ा। शायद फिर कभी बताओ। "ऐसा भी होता है" शीर्षक से
ये घटना तो मेरे घर की ही है, मेरे बड़े भाई साहब जो ठेकेदारी करते थे , और गाँव का खेती वगैरह भी देख रेख किया करते थे . हैम लोग स्कुल में पढते थे। ग्राम माटवाड़ा आने जाने के रास्ते में पंडरीपानी नामक गाँव पडता था जो कांकेर से २- कि मी लगभग दूर था। अब तो बस्ती काफ़ी बस गयी।, पहले काफ़ी सुनसान रहता था। रास्ते में शमशान भी पडता था और मुस्लिम कब्रिस्तान भी। एक बार काफ़ी रात को अपनी मोटर साइकिल से ,माटवाड़ा से आ रहे थे कि पण्डरीपानी पार करने के बाद सड़क पर एक सफ़ेद वस्त्र पहने एक महिलाए मिली , और रुकने का इशारा किया , लिफ्ट देने को कहा। परन्तु इतनी रात गए किसी महिला को लिफ्ट कैसे दे देते ? सो सरपट मोटर साइकिल भगाते गए। परन्तु शीध्र ही उन्हे पता चल गया कि वह महिला उनके मोटर साइकिल पर पीछे बैठ गयी है और उनके कंधो पर भी हाथ रखा दी है। दर कर वे मोटर साइकिल चलाते रहे और जैसे की कांकेर की सीमा में पहुंचे वह महिला जाने कहां गायब हो गयी तब घर पहुँचते पहुंचते समझ में आ गया कि कोई भटकती आत्मा/भूतनी थी। घर आकर पूरी घटना बताया।
मेरे बड़े साहब का स्वर्गवास ३ मार्च सन 1992 को हो गया। इसके पीछे भी एक भयानक कहानी से मुझे आमना सामना हुआ , और एक भयानक घटना से मुझे स्वयं को जूझना पड़ा। शायद फिर कभी बताओ। "ऐसा भी होता है" शीर्षक से
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