मेरी कुछ स्मृतियां लिख रहा हूँ जो पहले समझ नही पाता था पर परामनोवैज्ञानिक अध्ययन प्रयोग आदि के द्वारा समझ मे आया ये सब क्या है।
पिछले जन्म के अंतिम समय मे उस जन्म के किये गए अच्छे बुरे कार्य याद आई लगे मानो कोई कह रहा हो इसे देखो और याद करो।कुछ बुरे कर्म याद आये छोटे मोटे अच्छे कर्म भी। उसने कहा कोई खास उपलब्धि नही है ज्यादा बुरे भी नही। उसके बाद होश खो बैठा शायद मृत्यु हो गयी। फिर हल्का सा शरीर वायु जैसा और इच्छानुसार उड़ता हुआ पाया साथ मे एक और आत्मा भी थी साथी के रूप में मार्गदर्शक के रूप में। तभी मैंने एक वृक्ष के पास गड़ा धन सोना चांदी देखा तो लालच में आ गया कि देखो धन, इसे कब्जे में ले लेते है। साथी आत्मा ने समझाया लोभ और मोह में मत पड़ो ये हमारे किस काम के। और मोह में फंसे तो मुक्ति नही मिलेगी जबकि हमे मुक्ति चाहिए। नही तो इसी तरह रह जाएंगे । मैने कहा ठीक कहते हो हमे मोह लालच में नही पड़ना चाहिए नही तो ऐसे ही फंसे रह जाएंगे।
फिर मैंने कहा लोग कहते है भूत प्रेतों की।दुनिया यानी मृत्यु के बाद आत्माओं की दुनिया नही होती जबकि हम लोग तोमौत के बाद भी है। चलो लोगो को बताए कि इस लोक का अस्तित्व भी है। मित्र/साथी आत्मा ने समझाया मत करो कोई फायदा नही। दरअसल मृत्युलोक वासी न तो हमे देख सकते न हमे सुन सकते। यदि किसी प्रकार हमारी बात उन तक पहुंच भी जाये तो कोई विश्वास नही करेगा इसलिए कोशिस करना फालतू है। मैने उसकी बात मान ली
कालांतर में मैंने खुद को एक भिन्न लोक में पाया जहां पहाड़ियां और वीरानी थी चंद्रमा मंगल जैसा। एक शत्रु आत्मा मेरे सामने आ गयी उससे कोई बहस हुई फिर उसने कोई शक्ति फेंकी शायद मंत्र बम, मेरा दाहिना हाथ टूट गया
मैने कहा ये लो इसने तो मेरा दाहिना हाथ ही तोड़ डाला अब क्या करूँ। एक मित्र आत्मा बोली डरने की क्या बात कोई भौतिक शरीर थोड़ी है जो विकलांग हो गए।हाथ बढ़ाकर फिर निर्माण कर लो। मैने दाहिने ठूंठ को हिलाया वह बढ़कर फिर पूरा हाथ बन गया। योगी कथा अमृत के अनुसार वह शायद हिरण्य लोक था।
फिर कालांतर बाद किसी ने कहा तुम्हे फिर से जन्म लेना चाहिए तुम्हारी कुछ कर्म यात्रा बाकी है। मैने जिद पकड़ ली नही लूंगा। उसने ईश्वर से बात करा दी। एक सूर्य था जो प्रकाश किरणों के माध्यम से बात करता था बिना कान के भी सुनाई देता था और समझ मे आता था। उस सूर्य जैसे ईश्वर ने प्यार से मुझे पुचकारा जन्म ले लो न, कर्म यात्रा पूरी हो जाएगी। मैं भोला भाला सीधा साधा आत्मा उस सूर्य रूपी ईश्वर रूपी चक्कर मे फंस गया ह और हां कह दिया। फिर किसी एकाउंटेंट छाप व्यक्ति के पास ले गए उसने कुछ लिखा और घर दिखाने का निर्देश दिया। दो घर दिखाए गए मुझे यह भी कहा गया कि दो जन्मों के बीच चुनाव कर लो। एक मे बहुत कष्ट झेलना पड़ेगा जिससे सारे कर्म कट जाए, दूसरे में कष्ट कम होगा बचे कर्म फल के लिए एक जन्म और लेना पड़ेगा। मैने दुस्साहस करते हुए कहा किंतना भी कष्ट हो मैं झेल।लूंगा पर एक बार मे ही सब खत्म हो जाये
अब दो घर दिखाए गए मैने पहला ही पसंद कर लिया बाद में जिसमे जन्म लिया उसे ऊपर ही उड़ते हुए देख लिया था । एक घर दोमंजिला था ऊपर की मंजिल में बीच के हिस्से से आर पार उड़ान भरा और पसंद कर लिया कि इसी में जन्म लूंगा।
फिर वापस लिखा पढ़ी करने वाले के पास ले गए।उसने नोट किया फिर भेजने का निर्देश दिया। दिया। दो लोग पकड़ कर आसमान में ऊपर ही ऊपर ले गए फिर उपर से ही धक्का दे दिया। मैं गिरते2 भी जरा भी नही डरा पर होश खो बैठा। बाद में होश आया तो अपने को एक बन्द स्थान पर पाया जहां घनघोर अंधेरा था । इसके बाद या तो मैं सो गया या बेहोश हो गया। आगे याद नही कुछ भी
विचित्र बात-
आज से 45-50 वर्ष पूर्व मैने जीईसी रेडियों का एरियल थी करते समय 4 इंची ड्रोन देखा था 1जमीन से 0-15 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए क्या था ये कैसे समझ मे आएगा। पर अब समझ मे आता हूं कि दूसरे ग्रह के लोग पृथ्वी पर नजर रखते रहते है। वह ड्रोन विचित्र था उसके बीच लाइट जल रही थी पीले रंग की टार्च जैसी। और सर्पाकार तरीके से उड़ रहा था। फिर छत से उतर कर पुलिस लाइन पर कुछ फुट ऊंचाई पर उड़ने लगा समय शाम का था। काफी देर तक भौचक्के होकर देखते रहे आखिर ये उड़ने वाली चीज क्या है खिलौने जैसी।ये घटना 50 साल पूर्व की रही होगी मेरी आयु 10 वर्ष या कम रही होगी