सामान्यतः लोगो के मन में ये धारणा होती है कि सम्मोहन मेंड्रेक (कॉमिक पत्रिका) के जादू जैसा होता होगा। बस हाथ हिलाया,आँखों में देखा और सामने वाला गया काम से।
ऐसा नहीं होता, ये एक मन की शून्य विचार करने की प्रक्रिया है,जिसका परिणाम *योगनिंद्रा* या *तंद्रा* की अवस्था आती है।चूँकि इस अवस्था में चेतन मन सो जाता है,अतः मन की अमोध शक्तियों के बारे में पता चलता है और उनका उपयोग भी होता है। यही अवस्था मन की चिकित्सा में भी काम आता है। चिकित्सा संबंधी प्रयोग और उदाहरण तो एक भिन्न पेज "अजीबो गरीब समस्याओं की सम्मोहन चिकित्सा" नामक लेख में दे चुका हूँ।
यहाँ मैं सिर्फ परामनोवैज्ञानिक प्रयोगों के बारे में ही बताऊंगा।
1-मेरे गुरु और पिताजी के मित्र कुमार साहब से ज्ञान अर्जित करते समय उनसे एक घटना पता चली-
वे राजकुमार कालेज में पढ़ा करते थे,तब मित्रो के साथ प्रयोग किया।एक मित्र को हिप्नोटाइज (सम्मोहित)कर एक अन्य मित्र के यहाँ मानसिक रूप से भेजा,फिर उस मित्र के घर के बारे में सम्मोहित व्यक्ति से पूछताछ की,तो उसने बताया भाभी जी भिन्डी की सब्जी काट रही है,उनका छोटा बच्चा सीढ़ी चढ़ने की कोशिश कर रहा है,भाभी जी मना कर रही है कि गिर जाएगा,पर बच्चा है कि मान ही नहीं रहा,आखिर वो गिर भी गया,उसे उठाने की जल्दी में भाभी जी की ऊँगली भी कट गयी।
अब इन लोगो ने प्रयोग समाप्त कर उस मित्र के यहाँ जाकर देखा तो पाया-भिन्डी की सब्जी कटी हुई रखी है,भाभी जी की ऊँगली में पट्टी भी बंधी हुई है।पूछताछ करने पर सब कुछ वैसा ही बताया जैसा उस सम्मोहित व्यक्ति ने तंद्रावस्था में वर्णन किया था।
2-यह जानने के बाद मैंने खुद वैसा ही प्रयोग करके देखा।घर के एक सदस्य को सम्मोहित कर मानसिक रूप से ग्राउंड फ्लोर में पिताजी के कमरे में भेजा,और वर्णन करवाया तो सुना-पिताजी भोजन के बाद सरिता पत्रिका पढ़ रहे है,35 वां पेज है, तुरंत मैंने जाकर जांच किया तो पिताजी सरिता पत्रिका का 36 वे पेज का पहला पैराग्राफ पढ़ना शुरू किये थे। ये मेरा पहला प्रयोग था और आश्चर्यजनक भी।
3-ड्राइवर की नौकरी के लिए आये एक ग्रामीण युवक को सम्मोहित कर मानसिक रूप से पौन किलोमीटर दूर भेजा,पर निर्देश को ठीक से न समझ पाने के कारण वह निर्देशित घर की बजाय बगल वाले घर में घुस गया।वहां उसने जो वर्णन किया वो मेरी जानकारी से मेल नही खा रहा था, दूसरे दिन मैंने पाया कि बगल वाले घर के लोगो के बारे जो कुछ मेरे पात्र ने बताया वो सही था।
दूसरे दिन मैंने फिर उसी पर प्रयोग दुहराया, सम्मोहित पात्र ने उस घर के बारे मे बताया-एक बुढ़िया आराम से बैठी है, बगल कमरे में एक लड़की गोरी सी सोई हुई है। मैंने सोई हुई लड़की से नाम पूछकर बताने कहा तो उसने सही नाम बता दिया,इससे मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा। यानी एक सम्मोहित पात्र के दिमाग का सम्पर्क एक अन्य सोये हुए व्यक्ति के दिमाग से सफलता पूर्वक होने का प्रमाण है ये तो।
अंग्रेजी में इसे cliarvoyance कहते है, जबकि telepathy में दिमाग का सिर्फ संपर्क होता है।इसमें तो दिखाई भी देता है! यानी दिव्यदृष्टि ! इसका मतलब द्वापर युग में संजय ने इसी दृष्टि से देखकर धृतराष्ट्र को सब बताया था !