2001 से 2010 के बीच की बात है (ठीक2 वर्ष मुझे याद नहीं) मेरे एक मित्र की पत्नी बहुत कष्ट में दिन बिता रही थी। एक दिन मुझसे बोली मुझ पर टोने टोटके/तंत्र प्रयोग किये जा रहे है,पर राहत नहीं,बहुत मुश्किल महसूस कर रही हूँ ,इधर उधर देवस्थानों /झाड़फूंक करने वालो के पास भी घूम रही हूँ। ये सुनकर मुझे बहुत दया आ गयी,आप कुछ करे न मेरे लिए।
कहावत है न -"नया मुल्ला ज्यादा प्याज खाता है " !
मुझे भी ताव आ गया दयावश,मैंने कहा ठीक है मैं देखता हूँ ,परेशानी दूर करने की कोशिस करता हूँ।
मेरे ज्ञान और विद्या की परीक्षा करने का समय आ गया। घर आकर मैं पूजा में बैठ गया फिर बजरंगबली वाला एक प्रयोग उसके लिए कर बैठा।
उसका तो उतर गया पर 'नामुराद' मुझ पर चढ़ गया।
दो दिनों तक मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मुझे हो क्या रहा है। जैसे शनि राहु केतु सब लट्ठ लेकर मुझ पर पिल पड़े है।
तीसरे दिन मेरा माथा ठनका, कुछ गड़बड़ है,जब से मैंने उसके लिए प्रयोग किया है तभी से उसका भार मुझ पर आ गया है। अब क्या करूँ.
फिर एक काली मंदिर के परिचित पुजारी के पास जा पंहुचा जो थोड़ा बहुत झाड़ फूंक भी करता था और उसे सब बताया। तो उसने एक खुद पर उतारा विधि बताई और उसका 'रेंज 'भी ,कि इससे क्या2 हो सकता है।
अगले दिन प्रयोग करने का अनुकूल दिन था,मैंने उतारा प्रयोग खुद पर किया। देखे क्या होता है। आश्चर्य दूसरे दिन अपने आप मैं ठीक ठाक हो गया था,हल्का फुल्का प्रसन्नचित्त।
मेरे जीवन का पहला अनुभव था जब किसी की भलाई करते खुद चपेट में आया और समझ में आने के बाद मुक्ति भी पाया !
लोग ऐसा सब मजाक समझते है और चाहते है/जोर देते है कि अपने ज्ञान और विद्या से कोई उनका संकट दूर कर दे। प्रयोगकर्ता खुद भी संकट में पड़ जाता इसलिए बहुत सोंच समझ कर ही कोई भी विद्याधर किसी के मामले में हाथ डालता है। मैं खुद भी डरता हूँ अनुभव के बाद,जो अंधाधुंध तंत्र प्रयोग करते है,उन्हें खुद भी नाना प्रकार की परेशानी झेलते देखा है
-आर के बाफना