25 अक्टूबर 2018

उसका उतरा ,मुझ पर चढ़ गया

2001 से 2010 के बीच की बात है (ठीक2 वर्ष मुझे याद नहीं) मेरे एक मित्र की पत्नी बहुत कष्ट में दिन बिता रही थी। एक दिन मुझसे बोली मुझ पर टोने टोटके/तंत्र प्रयोग किये जा रहे है,पर राहत नहीं,बहुत मुश्किल महसूस कर रही हूँ ,इधर उधर देवस्थानों /झाड़फूंक करने वालो के पास भी घूम रही हूँ। ये सुनकर मुझे बहुत दया आ गयी,आप कुछ करे न मेरे लिए।

कहावत है न -"नया मुल्ला ज्यादा प्याज खाता है " !

मुझे भी ताव आ गया दयावश,मैंने कहा ठीक है मैं देखता हूँ ,परेशानी दूर करने की कोशिस करता हूँ।
मेरे ज्ञान और विद्या की परीक्षा करने का समय आ गया। घर आकर मैं पूजा में बैठ गया फिर बजरंगबली वाला एक प्रयोग उसके लिए कर बैठा।
उसका तो उतर गया पर 'नामुराद' मुझ पर चढ़ गया।
दो दिनों तक मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर मुझे हो क्या रहा है। जैसे शनि राहु केतु सब लट्ठ लेकर मुझ पर पिल पड़े है।
तीसरे दिन मेरा माथा ठनका, कुछ गड़बड़ है,जब से मैंने उसके लिए प्रयोग किया है तभी से उसका भार मुझ पर आ गया है। अब क्या करूँ.
फिर एक काली मंदिर के परिचित पुजारी के पास जा पंहुचा जो थोड़ा बहुत झाड़ फूंक भी करता था और उसे सब बताया। तो उसने एक खुद पर उतारा विधि बताई और उसका 'रेंज 'भी ,कि इससे क्या2 हो सकता है।
अगले दिन प्रयोग करने का अनुकूल दिन था,मैंने उतारा प्रयोग खुद पर किया। देखे क्या होता है। आश्चर्य दूसरे दिन अपने आप मैं ठीक ठाक हो गया था,हल्का फुल्का प्रसन्नचित्त।
मेरे जीवन का पहला अनुभव था जब किसी की भलाई करते खुद चपेट में आया और समझ में आने के बाद मुक्ति भी पाया !
लोग ऐसा सब मजाक समझते है और चाहते है/जोर देते है कि अपने ज्ञान और विद्या से कोई  उनका संकट दूर कर दे। प्रयोगकर्ता खुद भी संकट में पड़ जाता इसलिए बहुत सोंच समझ कर ही कोई भी विद्याधर किसी के मामले में हाथ डालता है। मैं खुद भी डरता हूँ अनुभव के बाद,जो अंधाधुंध तंत्र प्रयोग करते है,उन्हें खुद भी नाना प्रकार की परेशानी झेलते देखा है
-आर के बाफना

एक बैगा/गुनिया की परीक्षा

सितम्बर 2018 का महीना था, 23 सितम्बर ,रविवार को आफिस की छुट्टी रहती है इसलिए घूमने का मन बनाया, एक मित्र के साथ घूमने का प्लान बनाया।
पर रविवार को वह बीमार पड़ गया तो मैंने अकेले ही घूमने का मन बनाया।
काफी पहले से मैने सुन रखा था चंपारण के आगे एक गांव है जहां एक ग्रामीण तांत्रिक रहता है जो सिक्के में देखकर विचार करता है और बताया करता है।मैंने उसी की परीक्षा लेने का विचार किया।
(छत्तीसगढ़ में ग्रामीण तांत्रिकों को बैगा, गुनिया कहा जाता है)
घूमते हुए मैं वहां पहुंच गया। उस दिन वो घर पर ही सबको देख रहा था।कई कार वाले,मोटर साइकिल वाले आदि लोग पहुंचे हुए थे। यह देख मैं प्रभावित हुआ, काफी प्रसिद्ध है ये, कुछ तो बात होगी।
अंदर बहुत से लोग बैठे हुए थे, सामने हनुमान जी की मूर्ति स्थापित थी। मैने नारियल अगरबत्ती अर्पित कर चुपचाप बैठ गया। धीरे2 खाली होती जगह द्वारा मैं निकट आते गया। मेरे सामने एक वृद्धा थी, वह कह रही थी शरीर मे दर्द रहता है, पिछली बार आयी थी उससे भी क्यो फर्क नही पड़ा? बैगा ने दो पुड़िया दी एक मे प्रसाद था, खाने के लिए, दूसरे में राख(भस्म) था उसे शरीर मे चुपड़ने(लगाने) कहा घर जाकर।
(मेरे विचार से वृद्धा वातरोग से पीड़ित थी और उसका आयुर्वेद या होमियोपैथी से सही चिकित्सा हो जाती)
वृद्धा उठी और बड़बड़ाते हुए वहां से निकली कि बार2 आने के बाद भी कोई फर्क नही पड़ा, सब बेकार है।

फिर मेरी बारी आई, मैने साधारण से कपड़े पहन रखा था जिससे बैगा ये अनुमान नही लगा पाया था कि मैं नौकरी पेशा वाला हूँ या व्यवसायी। मेरा नम्बर आते ही तुरंत पूछ बैठा- क्या काम करते हो?
मैने कहा एक कम्पनी में नौकरी करता हूं।
तुरंत उसने अंधेरे में तीर मारा- 3 साल से नौकरी में परेशानी जा रही है क्या? मैने कहा नही तो, कोई परेशानी नही। फिर उसने कहा काम का यश नही मिलता होगा? मैंने कहा ऐसा भी नही।
उसके बाद न तो उसने कुछ पूछा न ही बताया। मेरे दिए सिक्के को बिना देखे अंदर फेंक दिया। फिर चट से 2 पुड़िया बांधी, और कहा एक कहा लेना, दूसरे तो शरीर मे लगा लेना। बाहर आकर खोल कर देखा, एक मे प्रसाद तो दूसरे में राख था। प्रसाद तो खैर मैने खा लिया, राख तो रास्ते मे आने वाली नदी में डाल दिया।

मैंने उसकी परीक्षा में एकदम बकवास पाया। दरअसल अंधभक्तो ने जरूरत से ज्यादा अफवाह फैला रखी है, और भीड़ भी। इन सब चीजों में, धार्मिक मामलों में लोग अपने दिमाग का दरवाजा बंद कर लेते है, सोंचने समझने को तैयार नही होते। हम भारतीयों के मन मे बचपन से धर्म, तंत्र मंत्र जैसे मामलों में शंका, संदेह नही करने का संस्कार डाला गया होता है, फिर लोग ठगी का शिकार होते है और शिकायत करते है, खुद की बेवकूफी को दोष कभी नही देते

30 अगस्त 2018

ज्योतिष क्यो पाखण्ड लगता है


आम व्यक्ति ज्योतिष विद्या को पाखण्ड, और ठग विद्या की दृष्टि से ही देखता है
✍इसमे ज्योतिषियों का ही बहुत बड़ा योगदान है क्योकि 95 प्रतिशत ज्योतिषी बैल बुद्धि के निकलते है, जो पढ़ लिया , उसी की जुगाली करते है, उसी को पत्थर की लकीर मानते है, कहा करते है शास्त्रों में जो लिखा है वह शत प्रतिशत सत्य है। जबकि वास्तविकता ये है किसी खोजी विद्वान ने शास्त्रों की रचना की, जनकल्याण के लिए और जो उसने पाया वो सिद्धांत उसने उल्लेख कर दिए। जिसकी शत प्रतिशत सत्य होने का दावा वह विद्वान भी खुद नही करता, कभी करेगा भी नही। ढकोसलेबाज ज्योतिषी उसे ब्रम्हवाक्य मानकर चलता है।
✍ज्योतिषियों को सिध्दांत अध्ययन के बाद प्रायोगिक या रिसर्चर होना चाहिए जो 95% ज्योतिषी होते ही नही।

🔯अनेक ज्योतिषी तिलक, चंदन लगाकर, ढेरो विचित्र मालाएं गले मे पहने हुए धर्मभीरु लोगो को सिर्फ मूर्ख बनाने के लिए तैयार रहते है।

🔯एक व्यक्ति दैनिक  राशिफल देखता है तो पाता है फलां तारीख से फलां तारीख के जन्म के अनुसार उसकी राशि वृष (मान ले) है तो दूसरे अखबार के अनुसार- 'क का की के'  यानी जन्म राशि मिथुन है।अब व्यक्ति भ्रम में पड़ जाता है उसकी राशि मिथुन है या वृष।

🔯अब कोई व्यक्ति लाइब्रेरी या कहीं 6 अखबार पढ़े और सबमे अपना राशि फल देखे तो 3 अखबार में लिखा पाता है-आज का दिन शुभ/अच्छा होगा तो 3 अन्य अखबार में आज का दिन अशुभ होगा। अब उसका दिन अच्छा गया तो 3 अखबारों का भविष्यफल सही हुआ, और दिन मुसीबतों से बीता तो अन्य 3 अखबारों का भविष्यफल सही हुआ।(यानी तीर और तुक्का, तिसपर ज्योतिष को विज्ञान घोषित किया गया !!)
चित भी उनका, पट भी उनका।

🔯एक उदाहरण और ले- एक व्यक्ति अपने राशिफल में  पाता है- दिन शुभ रहेगा, अचानक धन लाभ होगा, पर उसी दिन उसकी जेब कटती है, रुपये पैसे का नुकसान होता है, छोटामोटा एक्सीडेंट भी हो जाता है,शारीरिक तकलीफ झेलना पड़ता है। तो व्यक्ति कैसे मानेगा कि राशिफल सही साबित हुआ!
ऐसे में व्यक्ति ज्योतिषी से पूछेगा कि उसके साथ उल्टा क्यो हुआ तो एक घिसा पिटा जवाब उसे मिलेगा- आपकी राशि के करोड़ो लोग है, उन पर तो वैसा ही हुआ होगा।इसलिए राशिफल अनेको पर सही हुआ होगा। यानी फिर तीर या तुक्का ! सच ये है,उन अनेको को न आप पता कर सकते न वह ज्योतिषी।

🔯कई बार ऐसा भी हुआ है कि अपने सौर मंडल में अनेक ग्रह एक सीध में आ गए तो ज्योतिषियों ने हल्ला मचाया कि इसके प्रभाव से भूकम्प,प्रलय जैसी आपदा आएगी, हालांकि अनुभव बताते है कि ऐसा कुछ भी नही हुआ,धरती के किसी भाग मे भी नही। यानी ज्योतिषियों द्वारा की गई भविष्यवाणी बकवास ही साबित हुई।

🔯आप किसी भी पंचांग या कैलेंडर को उठाकर देखे तो सैकड़ो भविष्यवाणियां अपने देश सहित अनेक देशों के बारे में पाएंगे। बाद में होता ये है 100 भविष्यवाणी में एकाध सही साबित हुई तो ज्योतिषी/पञ्चाङ्ग ,कैलेंडर रचयिता ऐसा शोर मचाएगा मानो उसके कहने के अनुसार पहाड़ टूट गया, पर 99 गलत भविष्यवाणियों पर गहरी चुप्पी रखेगा।

🔯कुछ ज्योतिषी गोलमोल बातों को ही भविष्यवाणी के रूप में प्रस्तुत करते है जो किसी भी व्यक्ति पर  लागू होती है, जैसे-
💥आप सबका भला चाहते है पर आपकी इज्जत दूसरे नही करते(हर व्यक्ति अपनी नजर में अच्छा ही होता है)
💥आपके पास पैसा तो आता है पर टिकता नही(पैसा तो अम्बानी के पास भी नही टिकता, बिजनेस में पैसा रोल होता रहता है)
💥 आप महत्वकांक्षी है, कुछ बनना चाहते है,जीवन मे कुछ कर दिखाना चाहते है( हर व्यक्ति अपने जीवन मे कुछ करना ही चाहता है,सपना न देखे तो वह मुर्दा ही समझो)
💥आज का भविष्यफल- पड़ोसियों से सम्बन्ध अच्छा रखे, शत्रुओ से सावधान रहें,अपना कार्य मेहनत और लगन से करे,वाहन चलाने में सावधानी रखें। (ये भविष्यवाणी है या प्रवचन? खुद विचार करें इसमे भविष्यवाणी कहाँ है)

कुल मिलाकर दैनिक राशिफल, साप्ताहिक/मासिक राशिफल आदि सिवा बकवास के कुछ नही।और आपने को मार्डन बताने वाली प्रिंट मीडिया और टीवी मीडिया अंधविश्वास ही फैला रही है यही सिद्ध होता है।

ऐसे कई मामले सामने आए की 35-40 साल के सुखद वैवाहिक जीवन के बाद संयोग से कुंडली मिलाई गयी यो संयोग से पति पत्नी में एक मांगलिक निकला जबकि दूसरा नही। और ऐसे बेमेल विवाह का फल बताया गया वैसा कुछ नही हुआ था।

इसी तरह अन्य मामलों में विवाह पूर्व कुंडली मिलान के समय भृकुट दोष नाड़ी दोष बताकर संतान न होने की बात बताई गई पर ज्योतिष को डर किनारे कर विवाह हुआ और लड़की 3 बच्चों की मां भी बन गयी