27 अगस्त 2021

उसका अभिशप्त घर ठीक हो गया

 काल शुरू होने के पहले 2019 में मुझे बार 2  प्रेरणा होती थी कि कोंडागांव जाकर अपने पुराने परिचितों से मुलाकात करूँ। छुट्टी लेने की जरूरत भी नही, घूमना हो जाएगा।सो रविवार को सबेरे2 तैयार होकर बस द्वारा रवाना हो गया।वहां अपने कई पुराने परिचितों से मिला फिर आपने प्रिय मित्र से मिला।मैं सोंच रहा था अब तक उसका व्यवसाय बहुत बढ़ गया होगा पर उसकी दुकान की जगह आलू प्याज की दुकान दिखी मैं चौंक गया।फिर पास ही उसके घर गया वह आंगन में ही खड़ा था मुझे देखते ही पहचान भी गया।गले मिलने के बाद वह रुवांसा होकर बोला मैं अकेला रह गया हूँ मेरा साथ मत छोड़ना।उसके पिताजी और बड़े भाई परलोक सिधार चुके थे ।उसकी भी शादी हो चुकी थी और बच्चे भी बड़े हो चुके थे काम धंधे में लगे हुए थे। गरीबी का कष्ट जारी था। दुकान बिक गया था परिस्थितिवश। उसका पतन हो चुका था बहुत कष्ट में चल रहा था।उसकी मम्मी जिंदा थी पर मेरा मित्र  उससे लड़ता रहता था और अपनी मम्मी को(चाची जी को) रुलाता रहता था।(मित्र खुद भी भूत ग्रस्त था)
 वहां  बैठे आभास हुआ कि इसके पतन का कारण घर का अभिशप्त होना है। मैने कहा तेरी उन्नति हो गयी होगी सोंच कर आया पर तेरा तो बुरी तरह पतन हो गया है शायद तेरा घर अशुभ हो गया है। कोई पूजा पाठ वगैरह करवाये कर।उसकी धर्म पत्नी ने ने कहा  यहां के ब्राम्हणो को कुछ नही आता आप ही कुछ  कर दो या करवा दो। उसी समय प्रेरणावश मैं कह बैठा ठीक है अगले रविवार को मैं आता हूँ और कुछ करता हूँ। उनकी कुलदेवी की जानकारी ली फोटो वगैरह भी देखी।
अगले रविवार कुछ पूजन सामग्री  लेकर फिर कोंडागांव चला गया।चाची से पूछ ताछ करने पर ज्ञात हुआ कि रात्रि में उन्हें एक काली छाया अक्सर दिखती है जो  घर बेचकर कहीं और जाकर रहने को कहती है।
मैंने  कुछ और सामग्री किराना दुकान से मंगवाया।एक लोहे का पात्र/घमेला लेकर हवन की तैयारी की।फिर भाभी जी को लेकर उनकी कुलदेवी की पूजा की उनको भी पूजा सिखाया। फिर हवन में बैठ गया।मित्र और उसकी धर्म पत्नी दोनों को बैठाया और चंडी पत्रिका की एक हवन नामावली का उपयोग किया। बाद में राख आदि ठंडा करने का निर्देश देकर वापस आ गया।
मेरा मित्र भी बाहरी हवा(भूत बाधा )से पीड़ित था उस समय तक ,जो मै उस समय तक भांप नही पाया था जिसके वजह से वह अपनी मम्मी से अकारण लड़ता था और टेढ़े मुंह से बोलता था अस्पष्ट जो मैं समझ नही पाता था। मैंने कह दिया था आगे जो भी जरूरत पड़ेगी मुझे आने की जरूरत नही पड़ेगी वहीं रायपुर से बैठकर कर दूंगा। 3 महीने बाद मित्र के शरीर से ग्रहबाधा रोग दोष निवारण के लिए अपने स्थान से ही पूजा कर दिया।अगले 2-3 महीने में वह पूरी तरह ठीक जो गया।इसका घर सुधर गया उन्नति भी शुरू हो गयी।बीच2 मे फोन कर बताते भी रहे।परिणाम देखकर मैं भी प्रसन्न हुआ।डेढ़ साल बाद वह मुझसे मिलने सपरिवार कार लेकर आया तो स्वस्थ और मोटा भी हो गया था।बोलने में एक़दम स्पष्ट बोलता था चेहरा भी खिला हुआ था।घर मे आर्थिक उन्नति लगातार हो रही थी।सब कुछ अच्छा हो रहा था।उसके घर मे घुसा जिन्न भाग चुका था शरीर मे घुसा प्रेत भी भाग गया था। काली छाया दुबारा कभी दिखाई भी नही दी थी । सब ईश्वर की कृपा से हुआ था।मुझे कोंडागांव भी देवी ने ही तीव्र प्रेरणा देकर भेजा था मेरे हाथों ये कार्य सपन्न करवाना था ये मुझे देर सबेर समझ मे आ गया था