क्या ईश्वर सचमुच होता है? क्या भाग्य सचमुच होता है? क्या जीवन में घटने
वाली अनेक घटनाएं पूर्व निर्धारित होती है ? क्या सचमुच कोई ऐसी शक्ति है
जो संसार जो चला रही है?……. आदि अनेक प्रश्न आम व्यक्तियों के मन में हजारों
वर्षो से चलते आ रहे है ! विज्ञान के विकास के साथसाथ हर क्षेत्र में
व्यावसायिकता के चलते लोगो के मन में अविश्वास ऐसे प्रश्नों का बड़ा कारण
बनाता है ! वस्तुत: ऐसे प्रश्न करने वाला नास्तिक, कुतर्की नही बल्कि
जिज्ञासु मानकर उसे सच्चाई प्रमाण सहित बतायी जानी चाहिए ताकि भटकाव न हो
!!
हस्तरेखा अंधविश्वास नही !
कुछ वर्षो पहले एक विवाह में सम्मलित होने मै भाटापारा गया था , ऐसी जगहों पर अक्सर बरात चले जाने के बाद रिश्तेदार मुझे घेर लेते थे , यही मौका होता था उंनके द्वारा अपना भविष्य जानने का , और मेरे प्रयोगों का भी ! एक अधेड महिला मुझे बार बार तंग कर रही थी हाथ देखने के लिए , (बाद में पता चला वह राजनादगांव से आयी थी) ,सच में उसका हाथ देखने की इच्छा बिलकुल नही थी। टालने की कई कोशिश के बाद उसका मन रखने देखना शुरू कर दिया। देखते साथ मैंने उसकी आयु पूछी -बताया गया ५८ वर्ष। तुरंत मेरे मुंह से निकल गया - दो वर्ष पहले आपकी मृत्यु हो जानी थी , आप ज़िंदा कैसे हो मेरे सामने ? उसके जवाब से मेरे आश्चर्य का ठिकाना न था ! आप ठीक कहते हो ,मै सचमुच मर चुकी थी , मरने के बाद जब शमशान ले जाने की तैयारी हो गयी थी तभी मै पुन: जीवित हो गयी ऐसा लाखो मामले में एकाध मामला होता है पुन: ज़िंदा हो जाने का ! आस पास बैठे रिश्तेदार जो पहले कह चुके थे हम इन सब चीजो में विश्वास नही करते उनका मुह देखने लायक हो गया था !! (आयु रेखा दो वर्ष पहले अकाल मौत की सूचना दे रही थी , स्वास्थय रेखा जीवन रेखा को काट कर बुध पर्वत की और जा रही थी , जिस उम्र में स्वास्थय रेखा जीवन /आयु रेखा को काटती है वह अकाल मृत्यु का समय होता है , पुण्य से ही व्यक्ति बच पाता है )
काल आगमन दिखाई दिया :-
एक बार किसी काम से एक मोटर मैकेनिक के पास बैठा था अपने ट्रैक्टर की रिपेयरिंग सम्बन्धी कार्य से। उसके पास एक टैक्सी मालिक भी अपनी टैक्सी बनवाने आये थे। खटिया (पलंग) पर मेरे बाजु ही आ बैठे। मेरी नजर स्वाभाविक जिज्ञासा के कारण उनकी खुली हथेली पर पड़ गयी . मैंने मन ही मन उनकी आयु का हिसाब लगाने लगा - सोंचने लगा- मेरे बड़े भाई से इतने बडे है, इस हिसाब से तो इसी साल इनकी मृत्यु हो सकती है. सिर्फ १५ दिनों बाद वे सज्जन टैक्सी लेकर केसकाल जा रहे थे , रास्ते में एक ढाबे में रुके सब सवारिया चाय पीने उतर गयी , वो भी एक कप हाथ में लिये गाडी के पीछे स्टेपनी चेक करने जा पहुंचे , इतने में एक ट्रक ने टक्कर मार दी , अपनी टैक्सी और ट्रक के बीच दब गए , सर फ़ट गया , मष्तिष्क निकल कर दूर जा गिरा ! (आयु रेखा उम्र में इसी वर्ष अचानक समाप्त हो गयी थी )
मैंने उन्हें मरते देखा :-
मनुष्य जीवन का सबसे बडा सच जन्म लेना और मृत्यु का होना है , हजारो वर्षो से यह अटल विधान है। भले ही मनुष्य अमर होने की चाह में विज्ञान के नए नए प्रयोग करता रहता है. उन दिनों मेरे कपडे की दूकान थी, वर्ष १९९२ के लगभग। पडोसी मेरे दूकान आया जो काफ़ी परिचित था , बोला भैया मेरा हाथ भी ज़रा देख लो और उसने अपना हाथ फैला दिया। मैंने भी जिज्ञासावश देखा , उसकी उम्र पूछी , और जान लिया , दो वर्ष बाद उसकी मृत्यु दिखाई दे रही थी. मृत्यु की भविष्यवाणी बताई नही जाती अत: गुप्त रखते हुए , मैंने सिर्फ इतना कहा की दो साल तक तुम खूब मेहनत करो , उसके बाद भाग्य अनुकूल नही रहेगा। आस पास के किसी भी व्यक्ति को मैंने यह बात नही बताई, फ़ैल जाने का डर था. परन्तु घर जाकर अपनी पत्नी को बता दिया। दो साल बाद , उसे एक साधारण सी चोट लगी , एक डाक्टर पास जाने से उसे पट्टी बांधकर टिटेनस का इंजेक्शन लगा दिया गया , परन्तु वह इंजेक्शन रिएक्शन कर गया। डाक्टर ने उसे 'एण्टीडोन्ट' लगाया, परन्तु बेकार, फिर उसे वहां के सरकारी अस्पताल में दिखाया गया , डाक्टरो ने बहुत कोशिश की पर बेकार. फिर भिलाई के अस्पताल में ले गए वहा भी असफलता हाथ लगी , इसके बाद दिल्ली के आयुर्विज्ञान संस्थान में ले गए, परन्तु वहा से उसकी मृत्यु की खबर ही आयी। (रिएक्शन से पूरे शरीर में फफोले आ गए थे , कपडा पहनना भी मुश्किल था ). मै उस समय शहर से बाहर एक ग़ाव में था , खबर मिलने पर घर आया, घर आते साथ पत्नी से डॉट खाया- खबरदार किसी का हाथ देखे तो. मैंने कहा क्यों क्या हो गया ? उसने कहा जिसका हाथ देखते हो , मृत्यु देखने के बाद बताना नही , बात मै भूल चुका था जो पत्नी ने याद दिला दिया।(आयु रेखा दो वर्ष बाद समाप्त हो रही थी )
दूसरी पत्नी वास्तविक पत्नी थी :-
इसी दूकान में मेरे हाई स्कूल का सहपाठी मेरे पास आया - रेणिक तेरे से काम है , मैंने कहा बोल (मन में सोंचा कपडा उधार लेना होगा ) , उसने कहा तेरे को अपना हाथ दिखाना है, तू देखता है सुना है. मैंने कहा नही यार ये तो बस टाईम पास। उसने मेरे सामने हाथ फैला दिया , देखते साथ मैंने मुह फ़ट तरीके से कहना शुरू किया-तेरी बीबी दुष्ट है, कलहकारिणी है , हमेशा तुझसे लडती रहती है तेरा जीवन नरक बना दी है. बुरा मानने की बजाय स्वीकृति में सर हिला दिया। मैंने आगे कहा - और तू दूसरी के चक्कर में है, उससे शादी करूं या न करू , समझ में नही आया इसलिए तू मेरे पास आया है! उसने जवाब दिया - यही बात तो है गुरु , तीन महीने से इसी बात से परेशान हूं। मैंने कहा - करले , दूसरी ही तेरी वास्तविक पत्नी है उसी से तेरे को गृहस्थी सुख प्राप्त होगा ! तो पहली ?- उसने पूछा . मैंने कहा पहली तो तेरे पिछले जन्म की शत्रु है , तेरे से बदला लेने आयी है. छह मास बाद उससे मुलाक़ात हुई, उसने शादी कर ली थी और बहुत सुखी था . परन्तु भारतीय परम्परा का पालन करते पहली पत्नी को भी नही त्यागा था , पर पहली अब शांत रहती थी - निकाले जाने के डर से !! ( हस्तरेखा में रूचि रखने वालो के लिए- इसकी दो विवाह रेखाए थी पहली जो नीचे थी चन्द्र पर्वत की तरफ , वो उथली चौड़ी थी देखिये सेंन्ट जर्मन में उदाहरण , दूसरी विवाह रेखा लम्बी और गहरी थी , ह्रदय रेखा भी गुरु पर्वत तक लम्बी और गहरी थी , शुक्र पर्वत अच्छी तरह विकसित था . उथली विवाह रेखा कलहकारिणी झगड़ालू पत्नी का संकेत होता है, जबकि शुक्र पर्वत प्रेमी स्वभाव और ह्रदय रेखा गहरी और अच्छी लम्बाई किये भावनात्मक स्वभाव संकेत देता है )
क्या ये घटनाएं एक उदाहरण के तौर पर देखने के बाद भी मै या आप कह सकते है की ज्योतिष या हस्तरेखा महज एक अंधविश्वास है ?
हस्तरेखा अंधविश्वास नही !
नोट- यह लेख बिलासपुर (छ्.ग.)से प्रकाशित "प्रज्ञा तंत्र " नामक पत्रिका के सन २००४ के अंको में प्रकाशित हो चुका है. -रेणिक बाफना
पिछले २५-३० वर्षो से जिज्ञासापूर्वक हस्तरेखा अध्ययन एवं परीक्षा करते आ रहा हूं। सैकड़ो चौंका देनेवाली घटनाओ का साक्षी रहा हूं मै। जिनमे अनेक प्रश्नों के उत्तर स्वाभाविक रूप से मिलते रहे.पाठकों की रूचि के लिए असाधारण घटनाओं में से कुछ प्रस्तुत है (साथ में हस्तरेखा में रूचि रखने वालो के लिए पाया गया संकेत चिन्ह भी दे रहा हूं ज्ञान वृद्धि के लिए )-
वह मरकर ज़िंदा हो गयी थी ! :-पिछले २५-३० वर्षो से जिज्ञासापूर्वक हस्तरेखा अध्ययन एवं परीक्षा करते आ रहा हूं। सैकड़ो चौंका देनेवाली घटनाओ का साक्षी रहा हूं मै। जिनमे अनेक प्रश्नों के उत्तर स्वाभाविक रूप से मिलते रहे.पाठकों की रूचि के लिए असाधारण घटनाओं में से कुछ प्रस्तुत है (साथ में हस्तरेखा में रूचि रखने वालो के लिए पाया गया संकेत चिन्ह भी दे रहा हूं ज्ञान वृद्धि के लिए )-
कुछ वर्षो पहले एक विवाह में सम्मलित होने मै भाटापारा गया था , ऐसी जगहों पर अक्सर बरात चले जाने के बाद रिश्तेदार मुझे घेर लेते थे , यही मौका होता था उंनके द्वारा अपना भविष्य जानने का , और मेरे प्रयोगों का भी ! एक अधेड महिला मुझे बार बार तंग कर रही थी हाथ देखने के लिए , (बाद में पता चला वह राजनादगांव से आयी थी) ,सच में उसका हाथ देखने की इच्छा बिलकुल नही थी। टालने की कई कोशिश के बाद उसका मन रखने देखना शुरू कर दिया। देखते साथ मैंने उसकी आयु पूछी -बताया गया ५८ वर्ष। तुरंत मेरे मुंह से निकल गया - दो वर्ष पहले आपकी मृत्यु हो जानी थी , आप ज़िंदा कैसे हो मेरे सामने ? उसके जवाब से मेरे आश्चर्य का ठिकाना न था ! आप ठीक कहते हो ,मै सचमुच मर चुकी थी , मरने के बाद जब शमशान ले जाने की तैयारी हो गयी थी तभी मै पुन: जीवित हो गयी ऐसा लाखो मामले में एकाध मामला होता है पुन: ज़िंदा हो जाने का ! आस पास बैठे रिश्तेदार जो पहले कह चुके थे हम इन सब चीजो में विश्वास नही करते उनका मुह देखने लायक हो गया था !! (आयु रेखा दो वर्ष पहले अकाल मौत की सूचना दे रही थी , स्वास्थय रेखा जीवन रेखा को काट कर बुध पर्वत की और जा रही थी , जिस उम्र में स्वास्थय रेखा जीवन /आयु रेखा को काटती है वह अकाल मृत्यु का समय होता है , पुण्य से ही व्यक्ति बच पाता है )
काल आगमन दिखाई दिया :-
एक बार किसी काम से एक मोटर मैकेनिक के पास बैठा था अपने ट्रैक्टर की रिपेयरिंग सम्बन्धी कार्य से। उसके पास एक टैक्सी मालिक भी अपनी टैक्सी बनवाने आये थे। खटिया (पलंग) पर मेरे बाजु ही आ बैठे। मेरी नजर स्वाभाविक जिज्ञासा के कारण उनकी खुली हथेली पर पड़ गयी . मैंने मन ही मन उनकी आयु का हिसाब लगाने लगा - सोंचने लगा- मेरे बड़े भाई से इतने बडे है, इस हिसाब से तो इसी साल इनकी मृत्यु हो सकती है. सिर्फ १५ दिनों बाद वे सज्जन टैक्सी लेकर केसकाल जा रहे थे , रास्ते में एक ढाबे में रुके सब सवारिया चाय पीने उतर गयी , वो भी एक कप हाथ में लिये गाडी के पीछे स्टेपनी चेक करने जा पहुंचे , इतने में एक ट्रक ने टक्कर मार दी , अपनी टैक्सी और ट्रक के बीच दब गए , सर फ़ट गया , मष्तिष्क निकल कर दूर जा गिरा ! (आयु रेखा उम्र में इसी वर्ष अचानक समाप्त हो गयी थी )
मैंने उन्हें मरते देखा :-
मनुष्य जीवन का सबसे बडा सच जन्म लेना और मृत्यु का होना है , हजारो वर्षो से यह अटल विधान है। भले ही मनुष्य अमर होने की चाह में विज्ञान के नए नए प्रयोग करता रहता है. उन दिनों मेरे कपडे की दूकान थी, वर्ष १९९२ के लगभग। पडोसी मेरे दूकान आया जो काफ़ी परिचित था , बोला भैया मेरा हाथ भी ज़रा देख लो और उसने अपना हाथ फैला दिया। मैंने भी जिज्ञासावश देखा , उसकी उम्र पूछी , और जान लिया , दो वर्ष बाद उसकी मृत्यु दिखाई दे रही थी. मृत्यु की भविष्यवाणी बताई नही जाती अत: गुप्त रखते हुए , मैंने सिर्फ इतना कहा की दो साल तक तुम खूब मेहनत करो , उसके बाद भाग्य अनुकूल नही रहेगा। आस पास के किसी भी व्यक्ति को मैंने यह बात नही बताई, फ़ैल जाने का डर था. परन्तु घर जाकर अपनी पत्नी को बता दिया। दो साल बाद , उसे एक साधारण सी चोट लगी , एक डाक्टर पास जाने से उसे पट्टी बांधकर टिटेनस का इंजेक्शन लगा दिया गया , परन्तु वह इंजेक्शन रिएक्शन कर गया। डाक्टर ने उसे 'एण्टीडोन्ट' लगाया, परन्तु बेकार, फिर उसे वहां के सरकारी अस्पताल में दिखाया गया , डाक्टरो ने बहुत कोशिश की पर बेकार. फिर भिलाई के अस्पताल में ले गए वहा भी असफलता हाथ लगी , इसके बाद दिल्ली के आयुर्विज्ञान संस्थान में ले गए, परन्तु वहा से उसकी मृत्यु की खबर ही आयी। (रिएक्शन से पूरे शरीर में फफोले आ गए थे , कपडा पहनना भी मुश्किल था ). मै उस समय शहर से बाहर एक ग़ाव में था , खबर मिलने पर घर आया, घर आते साथ पत्नी से डॉट खाया- खबरदार किसी का हाथ देखे तो. मैंने कहा क्यों क्या हो गया ? उसने कहा जिसका हाथ देखते हो , मृत्यु देखने के बाद बताना नही , बात मै भूल चुका था जो पत्नी ने याद दिला दिया।(आयु रेखा दो वर्ष बाद समाप्त हो रही थी )
मन्त्र प्रभाव का प्रमाण मिला :-
मेरी इसी दूकान की लाईन में एक टेलर मास्टर की दूकान थी , ४२ वे वर्ष की आयु में उसकी टांग टूटी थी , स्टील राड भी लगाई गयी थी , किसी कुण्डली ज्योतिषी ने उसे दुर्घटना के बारे में पहले से बता दिया था। मेरी उत्सुकता इसी घटना को हस्तरेखा में देखने का था। मैंने हाथ देखते हुए दुर्घटना संकेत ढूढना शुरू किया जो कुण्डली देखकर बताया जा चुका था और घटना भी हो चुकी थी. परन्तु समझ में नही आया , पर विवाह रेखा के पास से एक प्रभाव रेखा जो झुककर ह्रदय रेखा को काट रही थी, ह्रदय रेखा सूर्य पर्वत के नीचे टूटी हुई थी टूटन के बीच के स्थान पर काले रंग का तिल था, पाया . स्पष्टत: कुछ उसकी पत्नी के साथ होने जारहा था ! मैंरे पूछने से पत्नी के साथ किसी प्रकार का मतभेद , झगड़ा जैसी किसी बात से इनकार किया। एक महीने बाद वह फिर आया तो मैने फिर देखा तो पाया - वह प्रभाव रेखा लुप्त हो रही थी , एक हल्का निशाँन बाकी था। मेरे पूछताछ करने पर उसने बताया की उसकी पत्नी पिछले लगभग तीन सालो से बीमार थी लगातार , विभिन्न डाक्टरों से इलाज कर थक चुका था , न रोग समझ में आ रहा था , न पैसा था खर्च करने को. उसी महीने में एक लाल कपडे पहने साधू आया जो अनेक वर्षो में एक बार आता था , एक कप चाय पीता था और चुपचाप चले जाता था। उसने साधू के सामने अपना दुखडा रोया , तो साधू ने आँख बंदकर कुछ सोंचा , फिर दुकान में जली अगरबत्ती की राख उससे मांगी, तो टेलर ने एक कागज़ पर रख कर दिया , फिर साधू ने राख पर मन्त्र फ़ूककर उसे देदिया -जा अपनी पत्नी को इसे खिला देना। टेलर ने वैसा ही किया। आश्चर्यजनक रूप से उसकी पत्नी दूसरे दिन से ठीक हो गयी। टेलर झूठ नही बोल रहा था , मैंने भी उस लाल कपडे वाले साधू को देखा था इसकी दूकान पर बैठे. अब मेरी भी समझ में आ गया की उसकी पत्नी से अलगाव योग था - मृत्यु के द्वारा ! जो मन्त्र प्रभाव से टल गया !
मेरी इसी दूकान की लाईन में एक टेलर मास्टर की दूकान थी , ४२ वे वर्ष की आयु में उसकी टांग टूटी थी , स्टील राड भी लगाई गयी थी , किसी कुण्डली ज्योतिषी ने उसे दुर्घटना के बारे में पहले से बता दिया था। मेरी उत्सुकता इसी घटना को हस्तरेखा में देखने का था। मैंने हाथ देखते हुए दुर्घटना संकेत ढूढना शुरू किया जो कुण्डली देखकर बताया जा चुका था और घटना भी हो चुकी थी. परन्तु समझ में नही आया , पर विवाह रेखा के पास से एक प्रभाव रेखा जो झुककर ह्रदय रेखा को काट रही थी, ह्रदय रेखा सूर्य पर्वत के नीचे टूटी हुई थी टूटन के बीच के स्थान पर काले रंग का तिल था, पाया . स्पष्टत: कुछ उसकी पत्नी के साथ होने जारहा था ! मैंरे पूछने से पत्नी के साथ किसी प्रकार का मतभेद , झगड़ा जैसी किसी बात से इनकार किया। एक महीने बाद वह फिर आया तो मैने फिर देखा तो पाया - वह प्रभाव रेखा लुप्त हो रही थी , एक हल्का निशाँन बाकी था। मेरे पूछताछ करने पर उसने बताया की उसकी पत्नी पिछले लगभग तीन सालो से बीमार थी लगातार , विभिन्न डाक्टरों से इलाज कर थक चुका था , न रोग समझ में आ रहा था , न पैसा था खर्च करने को. उसी महीने में एक लाल कपडे पहने साधू आया जो अनेक वर्षो में एक बार आता था , एक कप चाय पीता था और चुपचाप चले जाता था। उसने साधू के सामने अपना दुखडा रोया , तो साधू ने आँख बंदकर कुछ सोंचा , फिर दुकान में जली अगरबत्ती की राख उससे मांगी, तो टेलर ने एक कागज़ पर रख कर दिया , फिर साधू ने राख पर मन्त्र फ़ूककर उसे देदिया -जा अपनी पत्नी को इसे खिला देना। टेलर ने वैसा ही किया। आश्चर्यजनक रूप से उसकी पत्नी दूसरे दिन से ठीक हो गयी। टेलर झूठ नही बोल रहा था , मैंने भी उस लाल कपडे वाले साधू को देखा था इसकी दूकान पर बैठे. अब मेरी भी समझ में आ गया की उसकी पत्नी से अलगाव योग था - मृत्यु के द्वारा ! जो मन्त्र प्रभाव से टल गया !
इसी दूकान में मेरे हाई स्कूल का सहपाठी मेरे पास आया - रेणिक तेरे से काम है , मैंने कहा बोल (मन में सोंचा कपडा उधार लेना होगा ) , उसने कहा तेरे को अपना हाथ दिखाना है, तू देखता है सुना है. मैंने कहा नही यार ये तो बस टाईम पास। उसने मेरे सामने हाथ फैला दिया , देखते साथ मैंने मुह फ़ट तरीके से कहना शुरू किया-तेरी बीबी दुष्ट है, कलहकारिणी है , हमेशा तुझसे लडती रहती है तेरा जीवन नरक बना दी है. बुरा मानने की बजाय स्वीकृति में सर हिला दिया। मैंने आगे कहा - और तू दूसरी के चक्कर में है, उससे शादी करूं या न करू , समझ में नही आया इसलिए तू मेरे पास आया है! उसने जवाब दिया - यही बात तो है गुरु , तीन महीने से इसी बात से परेशान हूं। मैंने कहा - करले , दूसरी ही तेरी वास्तविक पत्नी है उसी से तेरे को गृहस्थी सुख प्राप्त होगा ! तो पहली ?- उसने पूछा . मैंने कहा पहली तो तेरे पिछले जन्म की शत्रु है , तेरे से बदला लेने आयी है. छह मास बाद उससे मुलाक़ात हुई, उसने शादी कर ली थी और बहुत सुखी था . परन्तु भारतीय परम्परा का पालन करते पहली पत्नी को भी नही त्यागा था , पर पहली अब शांत रहती थी - निकाले जाने के डर से !! ( हस्तरेखा में रूचि रखने वालो के लिए- इसकी दो विवाह रेखाए थी पहली जो नीचे थी चन्द्र पर्वत की तरफ , वो उथली चौड़ी थी देखिये सेंन्ट जर्मन में उदाहरण , दूसरी विवाह रेखा लम्बी और गहरी थी , ह्रदय रेखा भी गुरु पर्वत तक लम्बी और गहरी थी , शुक्र पर्वत अच्छी तरह विकसित था . उथली विवाह रेखा कलहकारिणी झगड़ालू पत्नी का संकेत होता है, जबकि शुक्र पर्वत प्रेमी स्वभाव और ह्रदय रेखा गहरी और अच्छी लम्बाई किये भावनात्मक स्वभाव संकेत देता है )

Pehli baar sach se sapna hua hai..
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