मैं तब एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सीनियर एकाउंट आफिसर के पद पर कार्यरत था। एक RTO एजेंट अक्सर मेरे पास आया करता था जो कंपनी की गाड़ियो के आर टी ओ संबंधी कार्य देखा करता था।
सबेरे 9.30 से लेकर 5.30 तक ड्यूटी रहती थी। इसके बाद मैं फ्री हो जाता था। अत: समय काटने के लिए मैंने हस्तरेखा ज्योतिष प्रेक्टिस करने का निर्णय किया वो भी अनेक रिश्तेदारो के सलाह देने के बाद,झिझकते हुए।
एक दिन RTO एजेंट ने यूँ ही पूछ लिया साहब शाम को इतनी जल्दी फ्री हो जाते हो उसके बाद आप क्या करते हो?टाइम पास कैसे करते हो? तब मैंने उसे बताया -लोग जो मेरे पास आ जाते है उनकी हस्तरेखा देखकर उनका मार्गदर्शन करता हूँ। ये जानकर उसे अचरज हुआ कि इतने समय से मैं आ रहा हूँ और मुझे पता ही नहीं। मैंने जवाब दिया न तुमने कभी पूछा तो बताऊंगा भी क्यों? खैर उसने मुझसे उसी दिन शाम का एपाइन्टमेंट ले लिया और आया भी। मैंने देखा सब ठीक ठाक था। फिर भी उसकी बाते सुन मैंने एक तंत्र संबंधी साधना उसे दी कि वो उसे घर पर किया करे।
आश्चर्य इस बात का हुआ कि वो जब भी प्रयोग करता,उसकी परेशानी बहुत बढ़ जाती। तब मैंने क्रमश: एक दिन की आड़ में,फिर कुछ दिनों के बाद सप्ताह में एक बार करने/पाठ करने को कहा। पर प्रयोग में ये पाया कि जिस दिन वो पाठ/प्रयोग करता उसी दिन उसके संकट बहुत बढ़ जाते थे। मुझे भी समझ में नहीं आता था आखिर भगवान् का नाम लेने से अशुभ क्यों साबित होता है!
ऐसा वो हर एक दो दिन बाद या फिर सप्ताह में एक बार आकर रोना रोता। आखिर मैंने उसे बिठाकर पूछताछ किया तो पता चला उसका घर किराए का था और पुराना घर था। मकान मालिक कही दूसरे घर में रहता था और इस घर को किराए पर चढ़ा दिया। फ़ौरन मुझे समझ में आ गया कि इसका निवास अभिशप्त है और वहां कोई अशुभ शक्ति का निवास है,जब ये प्रयोग/पाठ करता है तो उस अशुभ शक्ति को जैसे जूते पड़ते होंगे वो क्रुद्ध होकर और परेशान करती है।
ऐसा करते2 कई महीने बीत गए और वो हर हप्ते मेरे चक्कर लगाते रहा। महाशिवरात्रि का दिन आया,उस दिन मैं उपवास किया हुआ था और एक सुनसान शिवमंदिर जाकर हवन पूजन की योजना बना रखा था। इसकी तैयारी कर शांत बैठा ही था,कि वो आरटीओ एजेंट फिर आ धमका-बाफना जी मैं बहुत परेशान हूँ।क्या करू समझ में नहीं आ रहा।
मुझे भी ताव आ ही गया। मैंने कहा मैं भगवान् की पूजा करने जा ही रहा हूँ,चलोगे?उसने स्वीकृति दे दी,फिर मैंने कुछ और तैयारी कर उसे लेकर उस शिव मंदिर जा पंहुचा। प्रारंभिक सारी पूजा करने के बाद मैंने उसके घर के "समस्त उत्पात" समाप्त करने प्रयोग कर दिया। उसका कार्य होने के बाद वो तो ऐसे गायब हुआ जैसे गधे के सिर से सींग।
6माह बाद वो कही सड़क चलते दिखाई दिया,पर मुझे देखकर अनदेखा कर दिया तो मैं ही खुद उसके पास जाकर पूछ लिया-क्या हाल है? सब ठीक ठाक?अब तो घर में कोई परेशानी नहीं होती उस दिन के बाद? उसने बताया हां अब सब ठीक ठाक है।
मैंने जान लिया मेरा प्रयोग सफल हुआ। पर भारतीयो की ये आदत बड़ी खराब होती है कि काम होने के बाद न तो रिपोर्ट देना, और कई तो इतने कृतघ्न /अहसानफरामोश होते है कि हाय हेलो नमस्कार आदि भी भूल जाते है। यही हरकते साधको को उदासीन बना देती है और वे लोगो की भलाई न करने की कसम खा लेते है। ऐसा अनुभव मित्र साधको का भी रहा है। वे भी किसी को ध्यान इतनी आसानी से नहीं देते अब।
जिज्ञासा ने मुझे विभिन्न जांच और प्रयोगो के लिए ऊर्जा दी , उसके परिणाम मैं जिज्ञासु हिंदीभाषी पाठको के लिए प्रस्तुत करता हूँ , ताकि जो मैंने पाया वह औरो तक पहुंचे . In Search of Truth, My experiments went on, Here I present in Hindi - for the Curious Indian People-रेणिक बाफना ,रायपुर (छ.ग.)भारत [My another Blog->renikbafna@blogspot.com(MERE VICHAR)] Whatsapp-94063-00401, Please do not Call, only whatsapp
10 अगस्त 2016
R.T.O.Agent के घर का उद्धार
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