अन्जाने में कपट दुष्टता गुरुर की वजह से आदमी मुसीबत मोल ले लेता है जिसकी क्षति पूर्ति संभव ही नहीं हो पाती।
वर्षो पहले ग्राम डौंडी (जिला दुर्ग) के पास किसी व्यक्ति के मुंह से सुनी घटना का विवरण बताता हूँ ताकि आप सभी सावधान रहे और ऐसी गलती न कर डाले।
डौंडी के पास किसी छोटे से शहर या ग्राम (नाम तो अब याद नहीं क्योकि 1994 में सूना था) एक मारवाड़ी सेठ की कपडे की दूकान थी। उसके यहाँ एक ग्रामीण आया और उधार कपड़ा लिया ,सेठ ने दे दिया और उधार रजिस्टर/खाते में लिख लिया।
कुछ दिनों बाद वो ग्रामीण उधार चुकाने आया परंतु सेठ की बजाय उसका लड़का बैठा हुआ था। ग्रामीण ने उधार चुकाया,सेठ पुत्र ने पैसा ले लिया। ग्रामीण ने अनुरोध किया कि उधारी लिखे को काट दे या उसमे नोट करदे। लडके ने आश्वासन दिया चिंता मत करो हिसाब में आ जायेगा।
कुछ दिन बाद वो ग्रामीण फिर कपड़ा खरीदने आया तो सेठ बोला पिछ्ला उधारी तो चुकाया नहीं और ऊपर से फिर उधारी मांगने आया है। ग्रामीण ने कहा मैं तो आया था और उधारी चुका दिया,उस दिन आप नहीं बैठे थे आपका लड़का बैठा था। इस पर सेठ नाराज हो गया और कहा यदि उधार चुकता ही गया होता तो खाते में लिखा होता। झूठ बोलता है। ग्रामीण ने कहा सेठ जी अपने लडके को बुला कर पूछ तो लो।
इस पर सेठ आपा खो बैठा और ग्रामीण को थप्पड़ ही थप्पड़ मारा और पिछला उधारी चुकाने को कहा। ग्रामीण ने कहा बिना कुसूर असलियत जाने मुझे मारते हो,सेठ अब तुम कल का सूरज भी नहीं देख पाओगे। सेठ भी गुस्सा कर अहंकारवश बोला-जा जा क्या कर लेगा।
ग्रामीण दरअसल तंत्र के मारण विद्या में निपुण था जिसे मूठ या बाण मारना कहा जाता है। वहां से जाने के बाद उसने मूठ या बाण चला दिया। रात्रि में ही सेठ की मृत्यु हो गयी। सबेरे शवयात्रा निकली तो वही ग्रामीण सड़क के किनारे खड़ा होकर देखते बड़बड़ाया-कहा था न कल का सूरज नहीं देख पाओगे! पास में खड़े लोग सुन लिए।
अब ज्योतिष पक्ष में भी ज़रा नज़र डाल ही ले- हस्तरेखा और कुंडली ज्योतिष में जो दीर्घजीवी व्यक्ति दिखाई देता हो वह भी अकाल मौत का शिकार हो सकता है। ऐसे में स्टाम्प पर लिखकर देने का दावा करने वाला ज्योतिषी सही कैसे हो सकता है? शास्त्र एक सिद्धांत है पर समयानुसार अज्ञात कारणों से गलत भी साबित हो सकता है। मैंने कुछ केसेस में "विधि का विधान" गलत होते देखा है। इसलिए कभी अपने विज्ञापनों में लिखता था-
"मैंने विधि के विधान को देखा है,उसे सही होते भी और बदलते भी"
-आर के बाफना,रायपुर छ ग
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