24 अगस्त 2016

गढ़िया देव दर्शन

गढ़िया देव दर्शन-
ये सौभाग्य मुझे प्राप्त नहीं हुआ।
बस्तर जिले में पहाड़ियों का देवता होने की मान्यता है जिसे गढ़ियादेव कहते है। 1993 के लगभग वर्ष की बात थी उन दिनों मैं छोटे भाई के स्टोन क्रशर की देखभाल करता था। साईट में ही रहने की व्यवस्था छोटी सी झोपड़ी बना कर कर दी गयी थी। अक्सर रात्रि में मैं रुक जाया करता था। पलंग बिस्तर भी लगा रहता था। एक रात मैं वहां नहीं रुका था। दूसरे दिन सबेरे जब आया तो कर्मचारी डरे हुए थे। पूछने पर बताया कि रात्रि करीब 2 बजे के आसपास एक इंसानी चेहरे का कोई आया ,दिया कंडील जल ही रहा था उसकी रोशनी में साफ़ दिखाई दे रहा था, चौखट के सामने खड़ा हो गया और हम सबको ध्यान से देख रहा था। आगे पूछने पर बताया गया कि चेहरे पर भी काले2 बाल थे और पूरे शरीर पर भी बाल थे भालू जैसे पर वो भालू नहीं था। सभी 4-5 कर्मचारियो ने देखा था जो उस झोपड़ीनुमा घर में सोये हुए थे। उसने अज्ञात व्यक्ति ने न कुछ कहा, न कोई डराने वाली हरकत की। पर सभी लोग बुरी तरह  डर गए थे।
ग्रामीण लोग भालू को भली भाँती पहचानते है।
           मैं भी अचरज में पड़ गया कि वो भालू जैसा शरीरवाला और इंसानी चेहरे वाला जीव भला कौन हो सकता है। फिर उन ग्रामीणों ने जवाब दिया साहब ये गढ़िया देवता हो सकता है क्योकि आसपास पहाड़ है।
           उनका डर दूर करने के हिसाब से मैं बोला-फिर डरने की क्या बात है,वो तो देव था नुकसान थोड़ी पंहुचाता । तुम लोगो का सौभाग्य था कि तुम्हे देव का साक्षात् दर्शन हुआ। मैं कल रात रुका होता तो मुझे भी दर्शन का सौभाग्य होता। दर्शन करते ही उसे नमस्कार करता और पूजा भी।
        पर मुझे इस अद्वितीय मौके पर अनुपस्थित हो जाना बहुत अखरा।

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