एक सोमवार का दिन था, धर्म पत्नी ने सबेरे शंकर जी की पूजा की थी और एक केला अर्पित किया था।
रात्रि मैं माताजी और शंकर जी की पूजा में बैठा तो केला चढ़ा देखा और सोंचा शंकर जी का प्रसाद तो सीधे खाया नहीं जाता जब तक विष्णु भगवान् से स्पर्श न कराया जाए। अब इस केले का क्या करूँ।
तभी मुझे आभास हुआ- कल नंदी आएगा सबेरे2,उसे खिला देना। मैंने इस अनुभूति/अज्ञात कथन को ध्यान नहीं दिया। केला हटाकर एक तरफ रख दिया और पूजा किया।
दूसरे दिन सबेरे जब आँखे मलते2 उठा तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना न था,सचमुच एक गोल्लर/नंदी मेरे द्वार पर मेरे ही घर की ओर मुंह किये खड़ा था,जैसे हमारी प्रतीक्षा कर रहा हो। मैंने घर पर बताया-अरे ये नंदी तो सचमुच सामने आ चुका है यानी रात्रि को शंकर भगवान् ही मुझसे बोले थे,ऐसा कह पूरा किस्सा बताया। आम मेरे मोहल्ले में उन दिनों गाय बैल इत्यादि आया नहीं करते थे।
खैर मैंने सोंचा अभी तो मैं मंजन कर रहा हूँ, नहाधोकर ही पूजा स्थल में प्रवेश करू फिर केला इसे दे दूंगा। नंदी भी गया नहीं,ढीठ की तरह करीब 20 कदम दूर जाकर मेरे घर की ओर मुंह करके बैठ गया। नहा धोकर जब मैं शंकर जी वाला केलाप्रसाद लेकर उसे देने गया तो वह गुर्राया जैसे कह रहा हो इतनी देर क्यों किया !
केला खाकर भी वो गया नहीं बैठा रहा। अब मेरी पत्नी को प्रेरणा मिली उसे रोटी खिलाये। तो उसने एक मोटी रोटी बनाई उसे घी लगाकर शक्कर लगाकर नंदी को देने गयी तो शान्ति से बैठे2 ही खा लिया और खाने के तुरंत बाद चट से उठा और चल दिया। रोटी देते वक्त न तो गुर्राया न ही सींग हिलाकर पास आने पर डराया। बल्कि जैसे वह इसी का इन्तजार कर रहा था।
जिज्ञासा ने मुझे विभिन्न जांच और प्रयोगो के लिए ऊर्जा दी , उसके परिणाम मैं जिज्ञासु हिंदीभाषी पाठको के लिए प्रस्तुत करता हूँ , ताकि जो मैंने पाया वह औरो तक पहुंचे . In Search of Truth, My experiments went on, Here I present in Hindi - for the Curious Indian People-रेणिक बाफना ,रायपुर (छ.ग.)भारत [My another Blog->renikbafna@blogspot.com(MERE VICHAR)] Whatsapp-94063-00401, Please do not Call, only whatsapp
24 अगस्त 2016
कल सुबह नंदी आएगा
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