🌐जैसा कि मैंने कहा था कि भारत में ज्योतिष से भी बड़ी विद्याऍ मौजूद है। कुंडली और हस्तरेखा आदि विद्याएं इनके सामने कुछ भी नहीं। इन्हें दैवी सिद्धि कहा जाता है
💀🗿 1978 के पहले की घटना का उदाहरण देता हूँ।
मेरे अंग्रेजी के प्रोफ़ेसर श्री ठाकुर साहब अपने तीन मित्रो के साथ कांकेर के पूर्णिमा होटल में बैठकर बड़ा खा रहे थे। बातो2 में मित्रो ने बताया कि कांकेर से कुछ किलोमीटर दूर गाँव में एक ग्रामीण रहता है उसे कुछ सिध्दियां प्राप्त है।पीपल के पत्ते में देखकर कुछ भी बता देता है। ये सुनकर प्रोफ़ेसर साहब आश्चर्य चकित हो गए और बोल पड़े -"चल तो साले को देखते है"।
चारो होटल से नाश्ता करने के बाद जाने को तैयार हो गए। नाश्ता करने के बाद दो मित्रो को कुछ जरुरी काम आ गया तो वे जाने से इनकार कर बैठे।
👽अब प्रोफ़ेसर साहब एक मित्र के साथ उस गाँव में जा पंहुचे अपनी मोटरसाइकिल से। उस ग्रामीण से मिलने के बाद मित्र ने परिचय दिया और कहा ये साहब कुछ पूछने (विचार करवाने)आये है।ग्रामीण ने कहा बैठिये आराम से फिर बाड़ी से बाहर आकर हाथ पैर धोकर अपने स्थान पर बैठा और एक पीपल का पत्ता लेकर देखने लगा।
फिर बोला-वाह रे ,होटल में बैठकर बड़ा खा रहे थे, पर चटनी तो मुँह से बह रही थी साफसफाई से तो खाना था। हूँ,चार दोस्त बैठे थे,चारो आने वाले थे पर जरुरी काम आने से दो दोस्त नहीं आ पाये।
फिर ठाकुर साहब से पूछा-क्यों साहब मुझे क्यों गाली दे रहे थे?
ठाकुर साहब ने जवाब दिया मैंने तो कोई गाली नहीं दी !
इस पर ग्रामीण ने कहा-आप ही ने तो कहा था- चल तो "साले " को देखते है। क्या "साले " शब्द गाली नहीं? और मैं कब से आपका "साला " हो गया?
अब प्रोफ़ेसर ठाकुर का चेहरा सूख गया ये सुनकर तो। उन्होंने क्षमा मांगी और वापस आ गए।
जिज्ञासा ने मुझे विभिन्न जांच और प्रयोगो के लिए ऊर्जा दी , उसके परिणाम मैं जिज्ञासु हिंदीभाषी पाठको के लिए प्रस्तुत करता हूँ , ताकि जो मैंने पाया वह औरो तक पहुंचे . In Search of Truth, My experiments went on, Here I present in Hindi - for the Curious Indian People-रेणिक बाफना ,रायपुर (छ.ग.)भारत [My another Blog->renikbafna@blogspot.com(MERE VICHAR)] Whatsapp-94063-00401, Please do not Call, only whatsapp
21 अगस्त 2016
कैसे साहब मुझे क्यों गाली दिए थे?
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