केलपूज्य माता का चमत्कार (सच्ची घटना ) :-
जलगांव(महाराष्ट्र) के लालवानी जी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी ,पेचिश/डायरिया की शिकायत वर्षो से चलती आ रही थी , बार बार शौच जाना उनकी मजबूरी थी,वर्षो से यह सिलसिला चल रहा था बहुतेरा इलाज करा चुके थे , पर सब असफल साबित हुआ। डाक्टर बदले, पैथी बदली , पर सब बेकार साबित हुआ।
जलगांव(महाराष्ट्र) के लालवानी जी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी ,पेचिश/डायरिया की शिकायत वर्षो से चलती आ रही थी , बार बार शौच जाना उनकी मजबूरी थी,वर्षो से यह सिलसिला चल रहा था बहुतेरा इलाज करा चुके थे , पर सब असफल साबित हुआ। डाक्टर बदले, पैथी बदली , पर सब बेकार साबित हुआ।
एक दिन भटकते भटकते चालीसगाँव के प्रसिद्ध बाबा रामदेव के थान(देव स्थान ) में यूँ ही चले गए , वहां अचानक बाबा के अंग में उनकी कुलदेवी केलपूज्य माता आ गयी और कहने लगी- तुम्हे जो भी कष्ट हो रहा है उसका कारण मै (यानी देवी) ही हूँ। तुम मेरे मूल स्थान का उद्धार करो , मेरे बारे में अपने गोत्र वालो को बताओ तो सब कष्ट दूर हो जाएंगे।
ललवानी जी ने पूछा -मै ही क्यों देवी? और भी तो लालवानी गोत्र के लोग है उन्हें क्यों नहीं कहती ? देवी ने जवाब दिया - तुम पिछले जन्म में मेरे ही पुजारी थे ,मेरे मूल स्थान /मंदिर का उद्धार तुम्हारे हाथों से ही होना है। इसलिए तुम्हे परेशान कर रही थी ताकि तुम थक हार कर किसी थान में जाओ और मैं तुम्हारा कार्य बता सकूँ। लालवानी जी ने कहा -ठीक है पर ये मेरा अतिसार/पेचिश रोग दूर करो तो मुझे विश्वास हो जाए, फिर मैं करूंगा। देवी ने वर्षो से चले आ रहे रोग को तुरंत ठीक कर दिया।
अब लालवानी जी ने एक और संशय रखा-हे देवी मेरे पास पैसा धन संपत्ति नहीं है तो तुम्हारा मंदिर वगैरह कैसे बन पायेगा? जवाब दिया-तुम सिर्फ कार्य करने की ठानकर आगे बढ़ो, बाकी सब व्यवस्था मै करुँगी। देवी ने अपने मूल स्थान के गाँव का नाम भी बता दिया। यह भी बता दिया कि वह (यानी देवी स्वयं )केले के पेड़ से अवतरित हुई है, आदि ।
अब लालवानी जी गाँव खोजने में लग गए। खोजते-खोजते देवी के स्थान( गाँव) पहुँच भी गए , लोगो से पता किया तो एक भी मंदिर उस गाँव में नहीं था। काफी पूछताछ करने पर पता चला कि गाँव में एक स्थान है जहां लोग कभी-कभी एक लोटा पानी डालकर अगरबत्ती जला देते है.लालवानी जी उस स्थान पंहुचे तो उन्हें असीम शान्ति महसूस हुई जैसे माँ की गोद में किसी बालक को महसूस होता है। वे समझ गए यही केलपूज्य माता का स्थान है फिर उन्होंने उस स्थान की साफ़ सफाई की, वहां पूजित पत्थर को धोया ,साफ़ सुथरा किया , धूप दीप आदि जलाया , फिर कुछ गाँव वालो को इकट्ठा कर उनसे अनुरोध किया कि इस स्थान पर रोज धूप दीप जलाते रहे। कुछ दिन रुक कर एक चबूतरा भी बनवा दिया और उस देवी /अनगढ़ पत्त्थर को चबूतरे पर रखवा दिया। इधर जैसे-जैसे लालवानी जी कार्य करते जा रहे थे मंदिर के जीर्णोद्धार का , उनका काम धंधा भी जोर पकड़ता जा रहा था ,धन संपत्ति का जोरदार आगमन होना शुरू हो गया था। अपनी गरीबी और खस्ताहालत से तेजी से उभरने लगे. फिर मंदिर पूरी तरह से बनवाकर एक देवी की मूर्ति भी बनवाई ,और प्राण प्रतिष्ठा भी करवा दी। प्रतिष्ठा के समय , उनके मन में जप कराने की इच्छा हुई तो योग्य ब्राम्हण ढूंढने गाँव में घूमने लगे , न मिलने पर वापस मंदिर आये तो देवी पूजारी के अंग में आकर लालवानीजी पर भड़क गयी -कहाँ गया था तू ?लालवानी जी ने जवाब दिया -तेरे ही काम से निकला था , किसी योग्य ब्राम्हण को ढूंढने , ताकि तेरा जप करवा सकूँ। देवी ने दिया -क्या जरुरत इसकी ? तुझे मेरा नाम मालूम है और माला फिराना आता है , बस मेरे नाम को ही जपता चला जा माला लेकर। इतना ही काफी है इधर उधर मत जा , बस मेरे पास ही रह , इतना कहकर देवी शांत हो गयी। बार बार लालवानी जी अपनी कुलदेवी के पास मिलने आते रहे , इधर करोड़पति भी बन गए देवी कृपा से। उन्होंने ने एक पुस्तिका भी छपवाई और अपने गोत्र वालो को वितरण भी किया . (जैसा कि जलगांव वाले लालवानी जी ने बताया )
[" मेरी उत्पत्ति केले के पेड़ से हुई है अत: जिनकी (लालवानी गोत्र वालो की ) मै कुलदेवी हूँ उन्हें केला खाना और दूसरो को केला खिलाना तथा केले की खेती करना वर्जित है , जो इसका पालन नहीं करेगा उनकी संताने विकृत मस्तिष्क /पागल और विकलांग हो जाएंगे " देवी ने लालवानी जी को बताया ]
[" मेरी उत्पत्ति केले के पेड़ से हुई है अत: जिनकी (लालवानी गोत्र वालो की ) मै कुलदेवी हूँ उन्हें केला खाना और दूसरो को केला खिलाना तथा केले की खेती करना वर्जित है , जो इसका पालन नहीं करेगा उनकी संताने विकृत मस्तिष्क /पागल और विकलांग हो जाएंगे " देवी ने लालवानी जी को बताया ]
I am very much thankfully that you brought this incident in front of us .I am Barmecha by gotra can you tell me the book name which LALWANI ki distributed among his gotta.since I am barmecha our kuldevi is also Shree kelpujya mata Ji .
जवाब देंहटाएंShri Aman Ji
जवाब देंहटाएंLalwani Family is well known in JALGAON (MS), Now the detail given in the article is sufficient.They distribute the book merely introductory book only