5 जुलाई 2014

ऐसा भी होता है -२ धारावाहिक सत्य घटना

ऐसा भी होता है (२) धारावाहिक सत्य घटना
 घर  बारे में शंका क्यों हुई ,  पीछे  किस्सा है है - मृत भाई  बड़ी लडकी को भी (बड़ी भतीजी ) एक बार मिर्गी  दौरा पड़ गया , उस दिन सब लोग  डाक्टर चक्कर में दौड़ थे,मै सोंच विचार में डूबा बैठा था -दादा जी को बुढ़ापे में फिट्स (मिर्गी का दौरा ) आया, बुढ़ापे का रोग समझा गया, उनके जाने के बाद मेरी छोटी बहन को मिर्गी का दौरा आया,युवा अवस्था में दमित भावना के कारण रोग की उत्पत्ति समझी गयी। मंझली भतीजी को अब मिरगी आने लगी जो रोग हो गया ,3-4 वर्ष हो गए परन्तु इसकी मिर्गी ठीक नहीं हो पायी , दवाइयाँ दुगनी मात्रा में देना पड़ रहा है,अब तो बड़ी भतीजी को भी मिर्गी आने लगी ! एक ठीक होता है तो दूसरा शिकार हो जाता है ! ऐसा तो मिर्गी परम्परा देखने में नहीं आता !
                                दूसरे दिन मै महाराज को कांकेर लिवा लाया ,घर गए,पूजन स्थान में रखवाया निम्बू मंगवाया , एक फूल लिया, कुछ बुदबुदाते हुए नीम्बू पर फूंका ,फिर कान लगाकर सुनने जैसा करने लगे. कुछ क्षण उपरांत उन्होंने कहा -मुझे घर का एक एक हिस्सा दिखाओ, कुछ भी छूटना नहीं चाहिए . मै  घर का एक एक हिस्सा दिखाने लगा. घर के बाकी सदस्य सामने पड़े तो उन्होंने ध्यान न दिया , परन्तु मृत भाई के कमरे में पहुंचा तो उन्होंने भाभी (मृत भाई की विधवा)और उसकी सहेली को ध्यान से देखा। उस समय उसकी एक मात्र सहेली भी उसके साथ खड़ी थी। दीवार पर दिवंगत भाई की तस्वीर लगी थी ,उसे देखकर उन्होंने पूछा -इसी भाई की मृत्यु हुई थी न?  मेरे  हाँ कहने पर तस्वीर से नीम्बू स्पर्श कर कान के पास ले गए।  इसके बाद आगे बढ़ने मुझे कहा और शेष घर जल्दी जल्दी घूमने लगे। घूमना पूरा करने के बाद वापस सामने के कमरे में हम लोग आकर बैठे।
उन्होंने मुझे एक दिया,बत्ती,सात प्रकार के फूल चांवल वगैरह मंगाया।  एक पाटा बिछाकर कुछ करने लगें, मै  और माँ उत्सुकता से देखने लगे.फिर  एक कागज़ पर पेन से घर के सभी सदस्यों के नाम व घर के सभी हिस्से का नाम लिखने कहा।  दिया, अगरबत्ती, फूल से पूजा करने के बाद उन्होंने कहा -अभी मै कुछ नहीं बताऊंगा,पर इतना बता देता हूँ की पहले यह घर "बंधा" था , बांधने वाला असाधारण था , आज के जमाने में ऐसा व्यक्ति मिलना मुश्किल है. नया घर बनाते समय वो बंधन की वस्तु निकालकर फेंक दी गयी जिससे घर असुरक्षित हो गया और घर बिगड़ गया। घर के सभी लोग प्रभावित हो गये. कुलदेवी की भी नियमित पूजा अराधना नहीं होती. उनका स्थान भी नियत नहीं। मैंने महाराज से कहा -सुनने में सब बाते  अजीब लगती  है, परन्तु मै प्रभावित नहीं होऊंगा , इस पर उन्होंने जवाब दिया -सबसे ज्यादा असर तो तुम्ही पर है। बात उनकी रहस्यमयी , परन्तु सही थी।
                उन्हें चारामा पंहुचाकर मै वापस आ गया।  और ठन्डे दिमाग से विचार करने लगा। एक अनजान व्यक्ति पहली बार मेरे घर में आया ,कुछ भी मेरे या मेरे परिवार के बारे में नहीं जानता , कुछ भी उसे बताया नहीं गया , न ही पूछा गया, फिर भी 10 -12 वर्ष पुरानी बाते ठीक-ठीक बता गया। जो विस्मृत हो चुकी थी। पुराना घर मेरे मामाजी ने बांधा था ,वे असाधारण सिद्ध (औघड़ विद्या के ) माने जाते थे , उनके काफी किस्से मैंने सुने थे। 10-12 वर्ष  पहले  घर बना तो न तो कुलदेवी का स्थान नियत हुआ, न उनकी स्थापना हुई.(पहले मेरे घर में कुलदेवी का थान /स्थान था ) इतना ही नहीं मेरे छोटे भाई ने बेवकूफी की , मामाजी की जमीन में गड़ाई हुई सामग्री को फालतू चीज और अंधविश्वास है कह कर फेंक दिया।  मै उन दिनों बाहर रहता था . मुझे पता चला तो अच्छा नहीं लगा जिसके बारे में ज्ञान नहीं उसे छेड़ना भी ठीक नहीं।
                 महाराज जी की बाते रहस्यमय व आश्चर्यजनक थी,मै और जानने को उत्सुक था। दूसरे दिन मै पुन:  उनके पास गया और जानने की कोशिश की। उन्होंने बताया -पहले यह घर बंधा हुआ था।  अब घर बिगड़ा हुआ है बुरी तरह से। तुम्हारे बड़े भाई की अकाल मौत भी इसी वजह से हुई और तुम्हारा मामला मैं अपने हाथ में लेना नहीं चाहता। मेरे काफी अनुरोध पर उन्होंने हाथ में लेना स्वीकार किया और कहा की इस महीने के 24   से 28  तारीख के बीच आऊंगा और ठीक कर दूंगा। उन्होंने यह भी बताया कि मामला इतना खतरनाक है की जो इसे ठीक करने जायेगा ,अपने प्राणो से हाथ धो सकता है।
              इस मुलाक़ात के बाद अपने ट्रैक्टर का पम्प ठीक  कराने मै रायपुर गया। रायपुर में वही दो वर्ष पहले वाले भृगु ज्योतिष आये हुए थे, मेरे पास खाली समय था , इच्छा हुई क्यों न उनसे मिला जाये। भृगु ज्योतिष को भला क्या याद रहने वाला है की दो वर्ष पहले मै  उनके पास आया था और उन्होंने मुझे क्या बताया था ,सोंचा उनका पिछला लिखा कागज़ अभी नहीं दिखाऊंगा और कुंडली वगैरह भी नहीं दिखाऊंगा , पहले यूँ ही बताने दूंगा। ज्योतिषी ने मेरा नाम पूछा -क्या नाम है? रेणिक  बाफना। कहा से आये हो ? कांकेर से। कागज़ लेकर कुंडली जैसा चौकड़ी बनाया (शायद प्रश्न कुंडली थी ). फिर काली माई की तस्वीर की तरफ देखने लगे। तस्वीर की तरफ धूप दीप जल रहा था।फिर उन्होंने  कहना शुरू किया -तुम्हारी एक रिश्तेदार महिला है , बहुत निकट की है,तुम उसे अच्छे से जानते भी हो ,गोरा रंग ,माध्यम कद काठी , चहरे में चेचक के दाग है  उसने भयंकर तांत्रिक प्रयोग किया है जो उलटा भी हुआ है। इसी से तुम लोग परेशान हो , वह खुद भी भुगत रही है।  दो वर्ष पूर्व  तुम्हारे यहां किसी की मृत्यु हुई थी क्या ? मैंने कहा हाँ। उसने पूछा -अभी कितने भाई हो ? मैंने कहा दो, पहले तीन थे ,दो वर्ष  पहले बड़े भाई का ही  स्वर्गवास हुआ था। उसने कहा बड़े  की मृत्यु इसी तांत्रिक प्रयोग के उलटा हो जाने से हुआ था !प्रयोग करने वाली तुम्हारी बहुत निकट की रिश्तेदार है , तुम्हारे बाजू में ही रहती है ,नाम भी बता सकता हूँ , पर नाम बताना ठीक नहीं रहता ,इसलिए नहीं बता रहा हूँ। इसे जल्दी से जल्दी कटवाओ किसी भी हालत में। चाहे मेरे से , या किसी और से , पर जल्दी कटवाओ देर मत करना !मैंने ज्योतिषी को अपनी और पत्नी की कुंडली निकाल दिखाई तो देखकर उसने कहा -इसमें कोई दोष नहीं , तब दो वर्ष पुराने उसी ज्योतिषी के लिखे कागज़ भी दिखाए , उनकी पुरानी भविष्यवाणी भी बतायी की उनकी  बाते अक्षरश : सत्य हुयी।उसने जवाब दिया -गलत बातें  तो मै बताता ही नहीं। दो वर्ष पहले उन्होंने कहा था कि तुम दो माह बाद आने दूकान में बैठ नहीं पाओगे,जगह  जगह मारे मारे फिरोगे, न खाने का ठिकाना रहेगा, न पीने का. ये बाते मैंने बकवास मानकर दक्षिणा देकर चल दिया था। परन्तु बाद में ऐसा ही हुआ था सौ प्रतिशत। ( ज्योतिषी दर असल देवी सिद्धि प्राप्त था, ये ज्योतिष से भी ऊँची विद्या होती है )यहाँ भी बाते सोलह आने सच लग रही थी ,सभी लक्षण मेरी भाभी से मिल रहे थे ,शत प्रतिशत ! जो उसी घर में रह रही थी , बगल के कमरे में। मैंने उनसे कहा आपकी बाते और लक्षण मेरी भाभी से पूरी तरह से मिलते है,उसने जवाब दिया -इससे मुझे कोई मतलब नहीं ,नहीं तो झगड़ा हुआ तो जिम्मेदार मुझे माना जाएगा। ज्योतिषी से 10 -15 मिनट चर्चा करने के बाद मै वापस आ गया।
                          घर आकर मै गहरी सोंच में डूब गया। पिछली सारी  बाते याद करने लगा। पुरानी बिखरी कड़िया मेरे दिमाग में क्रम से जुड़ने लगी , प्रमाण देती गयी ,सच्चाई नग्न होती गयी ! पत्नी में मुझे लगातार विचारमग्न रहते देखा तो बहुत पूछने पर आखिर सच्चाई उसे बताना ही पड़ा कि  महाराज जी ने क्या बताया और भृगु ज्योतिष ने क्या बताया। बाते विचित्र है पर न तो निगलते बनाता है न उगलते ! तब पत्नी ने भी कई  बाते जो उसने मुझसे छिपाकर रखी थी, बतायी जो मेरी भी जानकारी में नहीं थी। मुझे यह भी याद आया की भाभी को की बार रात्रि में 9 -10 बजे शीतला मंदिर में आते जाते देखा था ,रात्रि में उधर कोई नहीं जाते क्योकि वह क्षेत्र सुनसान था , नगर का किनारा भी था , शराबी जुआरियो का भी जमघट लगता था। आवारा लोग भी उधर थे एकांत की वजह स,इस तरफ. भाभी को उसकी एकमात्र सहेली जो राजापारा में ही (हमारे मोहल्ले ) रहती थी
उसके साथ अन्नपूर्णा पारा की तरफ भी घूमते रात्रि में मैंने स्वयं देखा था जबकि उस तरफ रात्रि में उस मोहल्ले के लोग भी नहीं घूमते थे।  उस क्षेत्र में थोड़ी दूर पर देसी दारू भट्टी है ,मुस्लिम कब्रिस्तान भी और शमशान घाट भी है और नदी भीं मुझे यह भी याद आया कि भाभी रात्रि एक बजे तक भी घर आती थी कई  बार ,घर में कोई कुछ भी नहीं बोलता था क्योकि बड़ा भाई कमाऊ था। दुधारू गाय की लात भी भली लगती है। एकाध बार माँ ने टोका तो बड़े भाई ने ही माँ को ही कुछ  न कहने की हिदायत दी और  मै  "मुझे क्या करना है की तर्ज पर" अपने काम से काम रखता आया। क्योकि मेरे विवाह के पहले से ही घर पर मेरा दबदबा समाप्त हो चुका था। पिताजी तामसिक गुणों के थे ,जुआ शराब गांजा आदि की लत थी। बड़े भाई ठेकेदार थे ,उनमे भी पिताजी के कुछ गुण थे। मै कठोर प्रकृति का और इन चीजो से घृणा करने वाला था , अत : उम्र में छोटा होने के बाद भी बड़े मेरे सामने बौनापन महसूस करते थे। बड़प्पन भी मै कायम रखता था ताकि मेरे से छोटे  मै आदर्श बनू ,  बड़े तो गए काम से पर छोटो की नींव तो ठीक रहे। (क्रमश :)

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