7 जुलाई 2014

ऐसा भी होता है-3 (धारावाहिक सत्य घटना )

ऐसा भी  होता है-३ (धारावाहिक सत्य घटना ) 
[मूर्ख  सत्य का एक अंग देखता है और विद्वान सत्य के सौ अंगो को देखता है -थेर गाथा ]
                              माँ से मैंने बात की तो पता चला कि नया घर बनने के बाद एक बार मामाजी घर आये थे तो उन्होंने कहा था-मेरा गाड़ा हुआ  बंधन तुमने खोल दिया है , बहुत बेवकूफी की , अब ये घर बुरी तरह बिगड़ गया। बुढ़ापा आ गया है मेरे में इतनी शक्ति  नहीं कि  संभाल सकूँ। तुम लोग इस घर को छोड़ दो बहुत बिगड़ गया है। नहीं मानोगे तो एकाध की जान जायेगी।  यही बात उन्होंने बड़े भाई से भी कहा,परन्तु  दो ढाई लाख खर्च करके नया घर बना था , कैसे बेचने या  छोड़ने की बात सोंचते अत : ध्यान नहीं दिया गया। एक बार मुस्लिम फ़क़ीर से भी किसी कारणवश माँ की मुलाक़ात हुई ,शायद मिर्गी के मामले पर उसने विचार किया था, उसने हमारी भाभी से बात करने की इच्छा जाहिर की थी। इस हेतु घर पर आने या उसे (भाभी को) भेजने की बात भी कही थी , पर किसी मुस्लिम के सामने घर की बहु बेटी कैसे भेजे , अत: यह बात भी टाल दी गयी। एक बार गुजरात में जीजाजी ने बड़े भाई को एक संत को दिखाया,उन्होंने तांत्रिक प्रयोग के असर की बात कही (इस समय बड़े भाई साहब को हृदय रोग हो चुका था ) उस संत ने एक लाल डोरा पहनने को दिया था परन्तु भाभी ने भैया के गले में बांधने नहीं दिया, ऐसा मुझे माँ  ने बताया था ।
                                   जब मुझे प्रथम पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई तो मेरी पत्नी को माँ ने भाभी  से दूर रखने की हिदायत दी थी कि वो (भाभी ) दुष्ट औरत है , कहाँ-कहाँ जाती  है , शायद तंत्र मन्त्र सीख रही है।  एक बार मेरी बहन और मेरी पत्नी आपस में बाते कर रहे थे तब अचानक मेरी पत्नी पर देवी आई और चिल्लाकर बोली -मेरे रहते ये सब तंत्र मन्त्र इस घर पर नहीं चलेगा।  उसका चिल्लाना सुन भाभी तुरंत दौड़ते आई, "किसने किया है ,किसने किया है" बोलते हुए। (इसका रहस्य मुझे बाद में समझ में आया ) परन्तु बीच में मैंने मूर्खतावश कहा- ये शायद हिस्टीरिया है जाने दो भाभी। परन्तु मेरे ऐसा कहने पर देवी मुझ पर बिगड़ गयी,परन्तु मै विज्ञान का छात्र ,मनोविज्ञान पढ़ा हुआ ,भला ये कैसे परवाह करता?मै उस समय तक  प्रेत, देवी, देवता ये सब  नहीं मानता था ,और मै असामान्य मनोविज्ञान , परामनोविज्ञान के ज्ञान के घमंड से भरा हुआ था। ये छिटपुट घटनाये शायद मुझे व मेरे घर के सदस्यों को सावधान करने हुई थी ,परन्तु हम लोगो ने लापरवाहीवश ध्यान नहीं दिया। देवी आयी थी या नहीं, सच क्या था राम जाने (हालांकि देवी आने की पुष्टि बाद में हुई एवं मै चकित रह गया जानकर।  एक थान (देवस्थान) में बताया गया की देवी तुम्हे  सावधान करने भी आई थी परन्तु तुमने उसे ही उलटा सुल्टा कह दिया ) इन सबको याद करने के बाद मै जान  गया की "दाल में कुछ काला है। एक बहुत पुरानी बात और याद आयी -मै शायद 8 वी -9 वी पढ़ता था,सं 1971 -72 की बात थी , तब विख्यात ज्योतिषी राधाकृष्ण श्रीमाली रायपुर आकर होटल में ठहरे थे , मेरे बड़े भाई साहब उनके पास गये  थे (तब भैया अविवाहित थे),तो उन्होंने कुंडली देखकर कहा था -तुम्हारी शादी एक चेचक दाग वाली लड़की से होगी जो तुम्हारा पूरा घर तहस नहस कर देगी। 
                      नियत समय आया ,महाराज जी( रवेली -छुरा वाले ) नहीं आये।  26 से 28 फ़रवरी बीत  गयी. पता लगाया तो पता चला उनकी बातो  का ठिकाना नहीं , दो दिन के लिए बोलकर जाते है तो 15 दिन लटक जाते है। समय के पाबन्द नहीं , बेहद लापरवाह किस्म के व्यक्ति है ,ऐसा सबने बताया। उनका टेम्परेरी बंधन भी शायद खुल गया था , बेहद परेशानी सी महसूस हो रही थी। इधर दुष्ट भाभी को पता चल चुका था कि मै काफ़ी कुछ जान गया हूँ उसकी करतूत के बारे में। मै महाराज जी की तलाश में निकला , पर घर पर वे नहीं मिले,रायपुर गए है ऐसा पता चला रायपुर जाकर खोजा तो मिले, परन्तु आये नहीं, केवल आश्वासन दिया। समय बढ़ाकर, नवरात्रि में ठीक करने की बात कही।  पर उनका न  आना था , वे नहीं आये।  इस बीच भृगु ज्योतिषी से मिल कर आने के बाद मेंरे एक वकील मित्र (मुकेश श्रीवास्तव ) से डौंडी (दुर्ग जिले ) के साहब के बारे में पता चला.शिक्षा विभाग में ए. डी. आई. साहब थे,महाराज जी के  न आने  से निराश मै इनके पास गया इनकी विधि एकदम अलग थी . थान में बैठने के बाद मेरे हाथ  से निम्बू  लिया और दीपक की लौ पर तपाने लगे, क़ुछ सेकेण्ड बाद अचानक नींबू फट गया ,ऐसा कभी होता नहीं था. इस अचानक घटना से वे भी चौक पड़े , फिर काली माई की मूर्ति की और ध्यान से देखने लगे और बताया देवी माता मना कर रही है कि  यहां से बैठे-बैठे कुछ भी मत बताओ . इसके घर जाकर देखो और वहीँ कार्य भी कर दो . फिर डौंडी वाले सर (श्री मनसा राम जी शर्मा  को मै डौंडी वाले सर कहने लगा था बाद में  ) ने फटे नींबू के भीतर देखा तो  अंदर से एकदम काला हो गया था यह देखकर उन्होंने कहा अभी सिर्फ इतना मालूम पड़ता है की तुम्हारा घर बुरी तरह अभिशप्त हो गया है, क्यों और कैसे हुआ यह वही जाकर पता चलेगा . चूँकि मै तो केवल छानबीन (क्रास चेक)  करने आया था ,ले जाने की तैयारी से नहीं अत :भविष्य में आने की बात कहकर वापस आ गया अब तीन जगह से "दाल में काला "होने की बात स्पष्ट हो रही थी अत: सावधानी रखना आवश्यक हो गया था . विश्वास न होने पर भी लापरवाही करना ठीक नहीं था .
      (मेरा घर जैन मंदिर के ठीक सामने था ,मंदिर में ठहरने की व्यवस्था न होने के कारण सभी जैन पंथ के साधू साध्वियां मेरे घर के सामने वाले हिस्से में ठहरा करते थे . कहा जाता है की साधू संत तपस्वी के ठहरने से घर पवित्र हो जाता है . परन्तु यहां वह बात दिखाई नहीं देती . दूसरे दैवी आपदा निवारण का दायित्व धर्म गुरु का होता है,परन्तु वह भी नहीं हुआ )
              मार्च 1994 में मेरे छोटे भाई से खटपट हो गया, उसके मन में कपट आ गया , अब तो संभल गए है , क्रशर व्यवसाय से मुझे अलग कर दिया जबकि पहले पार्टनरशिप में  बात हुई थी . दो वर्ष की तपस्या निरर्थक हुई क्योकि बड़े भाई की मृत्यु के बाद चलती दूकान को ताला लगाया था सिर्फ घर को संभालने,बड़ा होने की नैतिक जिम्मेदारी का  बोझ था .अलग करते वक्त कुछ नहीं दिया, जबकि दो वर्ष मैंने घोर आर्थिक तंगी में  काटे थे . माँ बाप भी चुप रहे , क्योकि कमाऊ पूत ही प्यारा होता है . बल्कि आगे जाकर माँ बाप भाई बहू  अन्य रिश्तेदार बहनो सहित मेरे घोर विरोधी भी बन गए . यहां मेरी मुसीबते और बढ़ गयी . अब मुझे आगे की लड़ाई अकेले ही  लड़ना था . (क्रमश:…… )

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