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शास्त्र क्या है?
शास्त्रो की रचना पुराने ऋषि मुनियो और विद्वानजनो ने आने वाली पीढ़ी तक ज्ञान स्थानान्तरित करने के लिए ही की है।
उन सभी पूर्वजो,विद्वतजनों,मुनियो को शत्2 प्रणाम जिन्होंने अथक मेहनत से खोजबीन कर संकलन किया और आने वाली पीढ़ी के लिए अमूल्य ज्ञान छोड़ गए। अगर स्वार्थी बन ये सब नहीं करते तो हमारी ,हमारी पहले की और आने वाली पीढियां बेशकीमती ज्ञान से वंचित रह जाती। इस योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। करोडो लोग धरती पर आये कमाए खाये, आने वाली अपनी पीढ़ी के लिए धन संपत्ति जोड़ कर भगवान को प्यारे हो गए। पर जिन्होंने नि:स्वार्थ ज्ञान का संकलन कर दिया उसकी तुलना में करोडो अरबो की धन संपत्ति भी तुच्छ है। कई पीढ़ियों का उद्धार कर दिया चाहे लोग किसी भी वंश से जुड़े हो।
✍ अब मान लीजिये इनकम टैक्स की किताब है और इसे मैं रेशमी कपड़ा बिछाकर और रेशमी कपड़े से ढककर फूल चढ़ाकर अगरबत्ती जलाकर पूजा करूँ तो उसमे संकलित ज्ञान तो मेरे दिमाग में घुसने से रहा।
इसके लिए तो मुझे उसका गहन अध्ययन करना होगा और प्रयोग भी करना होगा,अपनाना होगा।
करीब2 यही हरकते हम लोग धर्मग्रंथो सहित सभी विद्याओ के ज्ञान सम्बंधित शास्त्रो/ग्रंथो के साथ करते आ रहे है। जो हमारी ही नादानी के सिवा कुछ भी नहीं। और ग्रन्थ/शास्त्र रचना का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो रहा।
✍ शास्त्र एक गुरु भी है बशर्ते उसे पढ़ा जाए,बुद्धिमतापूर्ण तरीके से उपयोग भी किया जाए। रही बात शास्त्रो से चिपके रहने की,तो ये कुपमंडूप्ता ही होगी।क्योकि शास्त्र एक नियमो/सिद्धान्तो का संकलन ही है। उसे गहराई तक समझने दिमाग की खिड़की खुली रखते हुए ही प्रयोग करे।क्योकि ज्ञान का क्षेत्र इतना विस्तृत है कि एक किताब में समाना असंभव ही है।
🔍दूसरी बात- विद्वानों ने खोजबीन से जो पाया उसका संकलन ही तो किया।
हो सकता है जिन सिद्धांतो को बताया उनके काल में अटलसत्य रहा हो।पर त्रेतायुग के सिद्धांत कलयुग में भी खरे उतरे क्या जरुरी है?
हर सिद्धांत के अपवाद भी होते है ये प्रकृति/भगवान की ही तो लीला है।
जब विज्ञान के सिद्धांतो के अपवाद हो सकते है तो ज्योतिष,अध्यात्म,तंत्र आदि जैसे अछूते कैसे रह सकते है?
इसलिए शास्त्रो को अध्ययन करो, मनन करो, चिंतन करो, आजमा कर देखो,अनुभव ही सत्य से साक्षात्कार करायेगा।
-आर के बाफना,रायपुर छ.ग.
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