ऐसा भी होता है -7 (धारावाहिक सत्य घटना )
एक बाल्टी में बोतल एवं अन्य सामग्री लेकर हम रवाना हो गए। सर जीजाजी के घर जाकर मंजन वगैरह दैनिक क्रियाएँ किये और मै व जीजाजी दूध नदी में गड्ढा खोदकर समस्त चीजे गड़ा दिये फिर जीजाजी के घर आ गए। दोपहर को सर जीजाजी के घर में पूजा के लिए बैठे , उनके सामने मेरी पत्नी को पुन: हिस्टीरिया जैसा दौरा पड़ा , सर ने तुरंत उठकर उसके सर के कुछ बाल तोड़े तो वह शांत हो गयी .सर ने सिर्फ इतना बताया -ये हिस्टीरिया नहीं था परन्तु क्या था, ये नहीं बताया , चुप रहे। जिज्ञासु रहना मेरा शुरू स्वभाव था।
मैंने सर से पूछा कि कार्य संपन्न हुआ कि नहीं , इसका पता कैसे चलेगा ,प्रमाण क्या होगा ? तो उन्होंने बताया -किये गए दुष्कर्म कर्ता के पास लौटते है और वह प्रभावित होता है। बहत्तर घंटे (72 ) में तुम्हारी भाभी बीमार पड़ जायेगी , ये प्रमाण है। शायद फिर कभी न उठ पाये ! सर वापस डौंडी लौट गए। तीसरे दिन सबेरे 72 पूरे हुए,हमलोग इंतज़ार कर रहे थे उत्सुकतापूर्वक। तब मैंने देखा -डायन भाभी जो रोज सुबह समय पर उठ जाती थी ,उस दिन 10-11 बजे तक उठ नहीं पायी। मैंने दूर से कमरे में झाँका तो पाया डायन भाभी जमीन चटाई बिछाकर सोयी थी और अभी भी वही पड़ी थी। मैंने अपनी पत्नी को व जीजाजी को बात बताई, इधर डायन भाभी बाद में किसी तरह से उठ गयी तुरंत अपनी ख़ास सहेली (रेखा पंसारी ) जिसे डायन न. 2 सांकेतिक नाम दिया था , के यहाँ गयी . दोपहर को वापस आयी तो पूरी तरह ठीक ठाक हो चुकी थी। दूसरे दिन मैंने देखा की सहेली (डायन न. २) व भाभी की बड़ी बेटी पम्मी गढ़िया पहाड़ चढ़ाई कर रहे थे। शायद शंकर भगवान को नारियल चढ़ाने। भाभी पूरी तरह चंगी हो गयी थी। फिर भी मैंने सोंचा -चलो कम से कम घर की अशुभता तो दूर हुई। परन्तु मेरा सोंचना गलत था। कुछ दिन बाद फिर से कुछ असामान्य सा लगने लगा।
(क्रमश:)
वह क्या था?-
सबेरे सात बज चुके थे , सर ने उलटा लोटा जीजाजी को पकड़ने कहा, बोतल पर कपड़ा ढककर नींबू हाथ में लिए कुछ बुदबुदाते हुए लोटा उठाने को कहा। इसके बाद बोतल में ढक्कन लगाए दिए। हम तीनो ध्यान से देख रहे थे. फिर बोतल में ढक्कन लगा दिए। इसके बाद बोतल लेकर धूप की तेज रोशनी में जाकर उलट पलट कर देखने लगे। एक मिनट बाद मैंने भी देखा- कुछ अजीब सी चीज दिखाई देने लगी। एक चिड़िया (गौरय्या ) बच्चे जैसा ,मानो अंडा फूटने के बाद निकला हो . परन्तु ये गौरय्या का बच्चा नहीं था जिससे मै बचपन से परिचित हूँ। इसकी चोंच ,डैना वगैरह नहीं था ,पेट वाले हिस्से में नीली नस भी उभरी हुई थी ,सिंदूर भी लगा था ,ऊपर और नीचे दो हाथ और दो पैर , मनुष्यो की भाँति मोड़कर परन्तु उंगलियाँ तीन, बदक के बच्चो जैसा ,ऊपर के दोनों हाथो से अपना मुंह ढके हुए। सबेरे सूर्य की रोशनी में सर के अलावा हम तीनो ने स्पष्ट रूप देखा, परखा परन्तु यह चीज तो हम लोगो के लिए भी अनजानी थी। सर ने बताया उसकी(डायन की ) पाली हुई चीज कृत्रिम शरीर सहित कैद हुआ है।एक बाल्टी में बोतल एवं अन्य सामग्री लेकर हम रवाना हो गए। सर जीजाजी के घर जाकर मंजन वगैरह दैनिक क्रियाएँ किये और मै व जीजाजी दूध नदी में गड्ढा खोदकर समस्त चीजे गड़ा दिये फिर जीजाजी के घर आ गए। दोपहर को सर जीजाजी के घर में पूजा के लिए बैठे , उनके सामने मेरी पत्नी को पुन: हिस्टीरिया जैसा दौरा पड़ा , सर ने तुरंत उठकर उसके सर के कुछ बाल तोड़े तो वह शांत हो गयी .सर ने सिर्फ इतना बताया -ये हिस्टीरिया नहीं था परन्तु क्या था, ये नहीं बताया , चुप रहे। जिज्ञासु रहना मेरा शुरू स्वभाव था।
मैंने सर से पूछा कि कार्य संपन्न हुआ कि नहीं , इसका पता कैसे चलेगा ,प्रमाण क्या होगा ? तो उन्होंने बताया -किये गए दुष्कर्म कर्ता के पास लौटते है और वह प्रभावित होता है। बहत्तर घंटे (72 ) में तुम्हारी भाभी बीमार पड़ जायेगी , ये प्रमाण है। शायद फिर कभी न उठ पाये ! सर वापस डौंडी लौट गए। तीसरे दिन सबेरे 72 पूरे हुए,हमलोग इंतज़ार कर रहे थे उत्सुकतापूर्वक। तब मैंने देखा -डायन भाभी जो रोज सुबह समय पर उठ जाती थी ,उस दिन 10-11 बजे तक उठ नहीं पायी। मैंने दूर से कमरे में झाँका तो पाया डायन भाभी जमीन चटाई बिछाकर सोयी थी और अभी भी वही पड़ी थी। मैंने अपनी पत्नी को व जीजाजी को बात बताई, इधर डायन भाभी बाद में किसी तरह से उठ गयी तुरंत अपनी ख़ास सहेली (रेखा पंसारी ) जिसे डायन न. 2 सांकेतिक नाम दिया था , के यहाँ गयी . दोपहर को वापस आयी तो पूरी तरह ठीक ठाक हो चुकी थी। दूसरे दिन मैंने देखा की सहेली (डायन न. २) व भाभी की बड़ी बेटी पम्मी गढ़िया पहाड़ चढ़ाई कर रहे थे। शायद शंकर भगवान को नारियल चढ़ाने। भाभी पूरी तरह चंगी हो गयी थी। फिर भी मैंने सोंचा -चलो कम से कम घर की अशुभता तो दूर हुई। परन्तु मेरा सोंचना गलत था। कुछ दिन बाद फिर से कुछ असामान्य सा लगने लगा।
(क्रमश:)
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