जब मैंने बाण /मूठ की मार खायी :
सन १९९८-९९ के आसपास की बात थी , मै आफिस में बैठे बैठे अपने कार्य में मशगूल था। कि अचानक मुझे घबराहट होने लगी बेहद पसीना आने लगा , तंग आकर मैं पंखे के ठीक नीचे जाकर बैठ गया अपना छोडकर। आस पास के कर्मचारी मुझे देखने लगे। पर मैं तो चुपचाप बैठा रहा। मुझे ऐसा लगने लगा मैं मर जाउगा , मेरी मृत्यु होने वाली है , इस प्रकार "मृत्यु भय" अकारण आने लगा , जिस पर मैं खुद भी आश्चर्यचकित था , ऐसा विचार आखिर क्यों आ रहा है मेरे दिमाग में ? फिर मैंने अपने इष्ट को याद करने लगा। शंकावश कुछ रक्षा मन्त्र जप भी करने लगा। थोड़ी देर में ठीक ठाक हो गया। शाम को मैं रवेली वाले महाराज जी(तीसरे गुरु) जो रायपुर आये हुए थे , उनके पास चला गया , और अपना आज का अजीब अनुभव बताया। उन्होंने एक नींबू मुझसे मंगवाया और कुछ पढ़कर देखने लगे फिर हंसने लगे - तुम्हे धूलबाण मारा गया था , तुमने रक्षा मंत्र का जप किया तो रुक गया। वापस चला गया। तुम्हारे छोटे भाई ने किसी ग्रामीण तांत्रिक को पैसे देकर चलवाया था ! (भाई सचमुच घोर शत्रु है , मैं जानता हूँ ) . उन्होंने कहा कल फिर उसी समय (दिन को 11 बजे) आयेगा एक बार और। दुष्ट तांत्रिक फिर कोशिश करेगा कि संयोग से बाण लौट गया है । महाराज जी ने नींबू फूंक कर दिया जेब में रखने को, रक्षा के लिए । दूसरे दिन- मैं फिर इंतज़ार कर रहा था आफिस में बैठे बैठे, अपना काम करते हुए , ठीक ग्यारह बजे सचमुच फिर वैसे ही लगा , आश्चर्यजनक रूप से। अबकी बार मै तैयार भी था , सब कुछ जानकर। मैंने थोड़ी देर महसूस करके पुनः रक्षामंत्र जपने लगा , थोड़ी देर में सब कुछ शांत हो गया। शाम को फिर महाराज जी से फिर मिला , तो उन्होंने बताया फिर धूलबाण लौट गया , अब सामने वाले दुष्ट तांत्रिक को पता चल गया कि, तुम्हे मालुम पड़ गया और तुमने लौटा दिया ,कल भी तुमने लौटा दिया तो उसने सोंचा कि अपने आप लौट गया होगा किसी कारण से। अब तीसरी बार कोशिश नहीं करेगा , नहीं तो उस तांत्रिक की मौत निश्चित है। तीसरे दिन मैंने इंतज़ार किया कि फिर कुछ होता है क्या उत्सुकतावश। पर सारे दिन वैसा महसूस नहीं हुआ। ये मेरा पहला अनुभव था बाण विद्या झेलने का।
(ग्रामीण क्षेत्रो में मन्त्र-तंत्र विद्याएँ चलती है , दरअसल ये शाबर मन्त्र आधारित होते है , बाण विद्या जिसे मूठ विद्या भी कहते है - क्रूर कर्म के नाम से पुकारा जाता है , इसे बाण मारना , या मूठ मारना भी कहते है , इससे किसी को काफ़ी पीड़ा पहुंचायी जाती है बाद में फिर उसकी मृत्यु भी हो जाती है। अतः ये मारण विद्या ही है, सिर्फ थोड़े से पैसो के बदले ये मूर्ख ग्रामीण उसका दुरुपयोग कर बैठते है , या सनकवश ऐसा करते है , लौट गया तो खुद ही मौत के शिकार हो जाते है। हालांकि मैंने कभी इसका परीक्षण करके नहीं देखा , पापकर्म है जिसका परिणाम भुगतना ही पडता है , परन्तु मेरी जानकारी में है -इनका अस्तित्व सचमुच है पाठको के ज्ञानवर्धन के लिए सच्ची घटना लिखा ,कि कैसा लगता है, ताकि सावधान रहे, ये अंधविश्वास है ऐसा सोंचने की गलती नही करे ! )
सन १९९८-९९ के आसपास की बात थी , मै आफिस में बैठे बैठे अपने कार्य में मशगूल था। कि अचानक मुझे घबराहट होने लगी बेहद पसीना आने लगा , तंग आकर मैं पंखे के ठीक नीचे जाकर बैठ गया अपना छोडकर। आस पास के कर्मचारी मुझे देखने लगे। पर मैं तो चुपचाप बैठा रहा। मुझे ऐसा लगने लगा मैं मर जाउगा , मेरी मृत्यु होने वाली है , इस प्रकार "मृत्यु भय" अकारण आने लगा , जिस पर मैं खुद भी आश्चर्यचकित था , ऐसा विचार आखिर क्यों आ रहा है मेरे दिमाग में ? फिर मैंने अपने इष्ट को याद करने लगा। शंकावश कुछ रक्षा मन्त्र जप भी करने लगा। थोड़ी देर में ठीक ठाक हो गया। शाम को मैं रवेली वाले महाराज जी(तीसरे गुरु) जो रायपुर आये हुए थे , उनके पास चला गया , और अपना आज का अजीब अनुभव बताया। उन्होंने एक नींबू मुझसे मंगवाया और कुछ पढ़कर देखने लगे फिर हंसने लगे - तुम्हे धूलबाण मारा गया था , तुमने रक्षा मंत्र का जप किया तो रुक गया। वापस चला गया। तुम्हारे छोटे भाई ने किसी ग्रामीण तांत्रिक को पैसे देकर चलवाया था ! (भाई सचमुच घोर शत्रु है , मैं जानता हूँ ) . उन्होंने कहा कल फिर उसी समय (दिन को 11 बजे) आयेगा एक बार और। दुष्ट तांत्रिक फिर कोशिश करेगा कि संयोग से बाण लौट गया है । महाराज जी ने नींबू फूंक कर दिया जेब में रखने को, रक्षा के लिए । दूसरे दिन- मैं फिर इंतज़ार कर रहा था आफिस में बैठे बैठे, अपना काम करते हुए , ठीक ग्यारह बजे सचमुच फिर वैसे ही लगा , आश्चर्यजनक रूप से। अबकी बार मै तैयार भी था , सब कुछ जानकर। मैंने थोड़ी देर महसूस करके पुनः रक्षामंत्र जपने लगा , थोड़ी देर में सब कुछ शांत हो गया। शाम को फिर महाराज जी से फिर मिला , तो उन्होंने बताया फिर धूलबाण लौट गया , अब सामने वाले दुष्ट तांत्रिक को पता चल गया कि, तुम्हे मालुम पड़ गया और तुमने लौटा दिया ,कल भी तुमने लौटा दिया तो उसने सोंचा कि अपने आप लौट गया होगा किसी कारण से। अब तीसरी बार कोशिश नहीं करेगा , नहीं तो उस तांत्रिक की मौत निश्चित है। तीसरे दिन मैंने इंतज़ार किया कि फिर कुछ होता है क्या उत्सुकतावश। पर सारे दिन वैसा महसूस नहीं हुआ। ये मेरा पहला अनुभव था बाण विद्या झेलने का।
(ग्रामीण क्षेत्रो में मन्त्र-तंत्र विद्याएँ चलती है , दरअसल ये शाबर मन्त्र आधारित होते है , बाण विद्या जिसे मूठ विद्या भी कहते है - क्रूर कर्म के नाम से पुकारा जाता है , इसे बाण मारना , या मूठ मारना भी कहते है , इससे किसी को काफ़ी पीड़ा पहुंचायी जाती है बाद में फिर उसकी मृत्यु भी हो जाती है। अतः ये मारण विद्या ही है, सिर्फ थोड़े से पैसो के बदले ये मूर्ख ग्रामीण उसका दुरुपयोग कर बैठते है , या सनकवश ऐसा करते है , लौट गया तो खुद ही मौत के शिकार हो जाते है। हालांकि मैंने कभी इसका परीक्षण करके नहीं देखा , पापकर्म है जिसका परिणाम भुगतना ही पडता है , परन्तु मेरी जानकारी में है -इनका अस्तित्व सचमुच है पाठको के ज्ञानवर्धन के लिए सच्ची घटना लिखा ,कि कैसा लगता है, ताकि सावधान रहे, ये अंधविश्वास है ऐसा सोंचने की गलती नही करे ! )
Kya aap ke guji aaj bhi he
जवाब देंहटाएंYes One shri Mansha Ram ji Sharma is alive and about 78 Yr. old, One shri Brijlal Prasad Dubey is not alive now.
हटाएंYes till today 14-6-2017, my Guru ji is alive
जवाब देंहटाएंपिछले दो सालो से मै काफी पतली हो गयी हू। पहले कुछ मेडिकल टेस्ट कराए पर सब नोरमल आया। थाइराइड भी नही पर वजन कम होता गया।
जवाब देंहटाएंफिर अचानक एक वर्ष पहले मेरी तबीयत काफी बिगड़ गई। एक मौलाना साब के झाड़ फूक के बाद सुधार आया। उन्होने बताया किसी ने बाण मारा है।
Baan or Mooth affacts immediately, what you have suffered is merely Jadu/Tonaa/Totka, which takes time and make sick first then it may kill also.
हटाएंKya ap guru ji ka koi sampark sutra de saktey Hai. friendsanik@gmail.com pe Bhej de mahan kripa hogi
जवाब देंहटाएंGuru ji is 78 Years Old now , his introduction has been given in another Blog- renikbafna@blogspot.com, Please see, for Address and Contact No.
हटाएंGuru Ji's address has been given in the Blog- renikbafna@blogspot.com
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