और इस तरह मिला सिरदर्द से छुटकारा !
घटना अगस्त 2015 की है। यानी नवीनतम ईश्वर नई 2 दिखाता है।
मेरे एक मित्र की पत्नी को हमेशा सिरदर्द रहता था . ऐसा की महीनो से या शायद वर्षो से था. एलोपैथी इलाज करा कराकर थक चुके थे पर कोई राहत नहीं। एक बार दर्द पीड़ित थी उसी समय मै संपर्क में आया। मैंने होमिओपैथी देने की सोंची। सबसे पहले "बादल छाने से आँखों में धुंधलापन छाना " लक्षण देखकर नेट्रम सल्फ दिया। दूसरे दिन थोड़ा ज्यादा दर्द हुआ। सोंचा प्रूविंग हो गयी इसलिए सहन करने का सुझाव दिया।
आगे उन्होंने 'एम्स' के एक होमिओ-डाक्टर से सलाह ली। उसने नक्स वोमिका दिया क्योकि साथ में कब्ज भी था। इसके बाद तो तेज बुखार ही छा गया। अब घबरा कर मित्र ने एक नर्सिंग होम में भर्ती कर दिया। (नक्स वोमिका से कई बार नकली बुखार , यदि बुखार दबा हुआ हो, तो आता है ) सारी जांच बाद , स्कैन वगैरह करने के बाद निकला 'कुछ नहीं' और शायद ह्रदय की कमजोरी बताकर, कुछ दवाइया देकर विदा किया अस्पताल से। इससे 17000/- रु का चूना लग गया।
अब मैंने पुन: बेलाडोना, ब्रायोनिया और जेल्सीमियम दवाइयाँ लक्षण दिया , पर सब बेकार सिद्ध हुई। फिर दूसरे दिन दर्द देखकर तत्काल राहत हेतु बंगला पान की पत्ती पर पिपरमेंट सत वाला अनुभूत प्रयोग किया पर सिर्फ सामने के माथे का दर्द ही ठीक हुआ।
दूसरे दिन फिर से सारे लक्षण लेते हुए बेक्सन कंपनी की एक पेटेंट दवा लिखा जो माइग्रेन में भी काम करती है। और दिन में चार बार अधिक बार लेने का निर्देश दिया। 2 सितम्बर 2015 को उसने चार बार लिया पर ज़रा भी असर नहीं दिखा। अब मै भी सोंच में पड़ गया और किसी अच्छे होम्यो डाक्टर को दिखाने कहा , एक डाक्टर का नाम भी सुझाया।
इसी दिन शाम को एक बैगा/झाड़फूंक करने वाला आया। संयोग से उसने दिखाया। उसने आश्वस्त किया। फिर एक बोतल शराब, दो निम्बू और अगरबत्ती मंगवा कर। फिर अपने साथ लाये एक पाइप में शराब भरकर मरीज से लगाकर खींचने का उपक्रम किया। तीन कंकड़ निकालकर दिखाया। फिर पूछा अब कैसा लग रहा है ? तो मरीज ने (भाभी जी) ने बताया की सिरदर्द उत्तर गया। अगले 48 घंटे मैंने जायजा लिया तो पाया मरीज एकदम ठीक हो चुका है जहा एलोपैथी , होमिओपैथी दवाइया फेल हो रही थी। वहाँ एक तंत्र प्रयोग ने मरीज को एकदम से राहत दे दी।
मै यह भी जानता हूँ की कुछ शिक्षित लोग कहेंगे कि यहां मनोवैज्ञानिक प्रभाव से सर दर्द ठीक हुआ ,कुछ सोचेंगे की अंतत: होमिओपैथी ने कमाल दिखाया और सिरदर्द ठीक होगा , पर निश्चित मानिए, कि न तो मनोवैज्ञानिक प्रभाव हुआ था, न वो किसी हिस्टीरिया की मरीज थी, न होमिओपैथी की दवाइयों का असर था। क्योकि मै मरीज को जानने लगा था, होमिओपैथी खुद मैंने दिया था। किसी समय मै खुद माइग्रेन (एक प्रकार के सिरदर्द की बीमारी)से दस साल भुगता था। और होमिओपैथी से स्थायी रूप से छुटकारा पाया था ,अत: असर कैसे होता है मै भलीभांति जानता था। मुझे बार फिर तंत्र /मन्त्र प्रभाव का प्रमाण मिला।
मित्र ने जब पूछा कि हुआ क्या था तो बैगा ने हंसकर जवाब दिया -आम खाने पर ध्यान दो, गुठली गिनने से क्या लाभ ?
वास्तव में बैगा लोग बताते नहीं, नहीं तो झगड़ा हो जाता है रिश्तेदारो परिचितों से , क्रोध में, या फिर पुलिस केस बन जाता है। इसलिए परहेज करते है।
क्या हुआ होगा - किसी ने ईर्ष्यावश 'किसी को' बीमार करने कंकड़ अभिमंत्रित कर छोड़ा होगा ,उसी की मरीज तंत्र प्रभाव से पीड़ित हुई। ऐसा प्रयोग (शत्रु पीड़क प्रयोग ) तंत्र शास्त्र में मुझे पढने में आया था। ऐसे मामलों में अक्सर कोई दवा काम नहीं करती है और जांच में भी कुछ नहीं निकलता है। परन्तु मेरा मित्र अगस्त के ही करीब 19000 /- के खर्चे में उत्तर गया , दौड़भाग , परेशानी अलग।
( शत्रुपीड़क प्रयोग एक पाप कर्म होता है , सिर्फ ईर्ष्यावश प्रोयोग करने से आगे जाकर भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते है ,जबकि आत्मरक्षा हेतु प्रयोग में पाप नहीं परन्तु आपका पक्ष धर्म का हो )
घटना अगस्त 2015 की है। यानी नवीनतम ईश्वर नई 2 दिखाता है।
मेरे एक मित्र की पत्नी को हमेशा सिरदर्द रहता था . ऐसा की महीनो से या शायद वर्षो से था. एलोपैथी इलाज करा कराकर थक चुके थे पर कोई राहत नहीं। एक बार दर्द पीड़ित थी उसी समय मै संपर्क में आया। मैंने होमिओपैथी देने की सोंची। सबसे पहले "बादल छाने से आँखों में धुंधलापन छाना " लक्षण देखकर नेट्रम सल्फ दिया। दूसरे दिन थोड़ा ज्यादा दर्द हुआ। सोंचा प्रूविंग हो गयी इसलिए सहन करने का सुझाव दिया।
आगे उन्होंने 'एम्स' के एक होमिओ-डाक्टर से सलाह ली। उसने नक्स वोमिका दिया क्योकि साथ में कब्ज भी था। इसके बाद तो तेज बुखार ही छा गया। अब घबरा कर मित्र ने एक नर्सिंग होम में भर्ती कर दिया। (नक्स वोमिका से कई बार नकली बुखार , यदि बुखार दबा हुआ हो, तो आता है ) सारी जांच बाद , स्कैन वगैरह करने के बाद निकला 'कुछ नहीं' और शायद ह्रदय की कमजोरी बताकर, कुछ दवाइया देकर विदा किया अस्पताल से। इससे 17000/- रु का चूना लग गया।
अब मैंने पुन: बेलाडोना, ब्रायोनिया और जेल्सीमियम दवाइयाँ लक्षण दिया , पर सब बेकार सिद्ध हुई। फिर दूसरे दिन दर्द देखकर तत्काल राहत हेतु बंगला पान की पत्ती पर पिपरमेंट सत वाला अनुभूत प्रयोग किया पर सिर्फ सामने के माथे का दर्द ही ठीक हुआ।
दूसरे दिन फिर से सारे लक्षण लेते हुए बेक्सन कंपनी की एक पेटेंट दवा लिखा जो माइग्रेन में भी काम करती है। और दिन में चार बार अधिक बार लेने का निर्देश दिया। 2 सितम्बर 2015 को उसने चार बार लिया पर ज़रा भी असर नहीं दिखा। अब मै भी सोंच में पड़ गया और किसी अच्छे होम्यो डाक्टर को दिखाने कहा , एक डाक्टर का नाम भी सुझाया।
इसी दिन शाम को एक बैगा/झाड़फूंक करने वाला आया। संयोग से उसने दिखाया। उसने आश्वस्त किया। फिर एक बोतल शराब, दो निम्बू और अगरबत्ती मंगवा कर। फिर अपने साथ लाये एक पाइप में शराब भरकर मरीज से लगाकर खींचने का उपक्रम किया। तीन कंकड़ निकालकर दिखाया। फिर पूछा अब कैसा लग रहा है ? तो मरीज ने (भाभी जी) ने बताया की सिरदर्द उत्तर गया। अगले 48 घंटे मैंने जायजा लिया तो पाया मरीज एकदम ठीक हो चुका है जहा एलोपैथी , होमिओपैथी दवाइया फेल हो रही थी। वहाँ एक तंत्र प्रयोग ने मरीज को एकदम से राहत दे दी।
मै यह भी जानता हूँ की कुछ शिक्षित लोग कहेंगे कि यहां मनोवैज्ञानिक प्रभाव से सर दर्द ठीक हुआ ,कुछ सोचेंगे की अंतत: होमिओपैथी ने कमाल दिखाया और सिरदर्द ठीक होगा , पर निश्चित मानिए, कि न तो मनोवैज्ञानिक प्रभाव हुआ था, न वो किसी हिस्टीरिया की मरीज थी, न होमिओपैथी की दवाइयों का असर था। क्योकि मै मरीज को जानने लगा था, होमिओपैथी खुद मैंने दिया था। किसी समय मै खुद माइग्रेन (एक प्रकार के सिरदर्द की बीमारी)से दस साल भुगता था। और होमिओपैथी से स्थायी रूप से छुटकारा पाया था ,अत: असर कैसे होता है मै भलीभांति जानता था। मुझे बार फिर तंत्र /मन्त्र प्रभाव का प्रमाण मिला।
मित्र ने जब पूछा कि हुआ क्या था तो बैगा ने हंसकर जवाब दिया -आम खाने पर ध्यान दो, गुठली गिनने से क्या लाभ ?
वास्तव में बैगा लोग बताते नहीं, नहीं तो झगड़ा हो जाता है रिश्तेदारो परिचितों से , क्रोध में, या फिर पुलिस केस बन जाता है। इसलिए परहेज करते है।
क्या हुआ होगा - किसी ने ईर्ष्यावश 'किसी को' बीमार करने कंकड़ अभिमंत्रित कर छोड़ा होगा ,उसी की मरीज तंत्र प्रभाव से पीड़ित हुई। ऐसा प्रयोग (शत्रु पीड़क प्रयोग ) तंत्र शास्त्र में मुझे पढने में आया था। ऐसे मामलों में अक्सर कोई दवा काम नहीं करती है और जांच में भी कुछ नहीं निकलता है। परन्तु मेरा मित्र अगस्त के ही करीब 19000 /- के खर्चे में उत्तर गया , दौड़भाग , परेशानी अलग।
( शत्रुपीड़क प्रयोग एक पाप कर्म होता है , सिर्फ ईर्ष्यावश प्रोयोग करने से आगे जाकर भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते है ,जबकि आत्मरक्षा हेतु प्रयोग में पाप नहीं परन्तु आपका पक्ष धर्म का हो )
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