15 अप्रैल 2022

चटिया मटिया(बाल प्रेत)होते ही है

छत्तीसगढ़ में बाल प्रेतों को पालने की बाते बचपन से सुनता आ रहा हूं पर देखने कभी नही मिला।बचपन में एक जैन परिवार के यहां जाता करता था तो उनके घर के अंदर की बाड़ी या बड़ा आंगन में एक कोने पर जाने से मना किया जाता था कि उधर मत जाना उधर देवता रहता है।दरअसल मटिया/चटिया पाला हुआ था।
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण भूत प्रेत पाल लेते है  और उसे देवता कहकर पुकारते है। इन बाल प्रेतों से धान आदि चोरी करवाने का काम अक्सर करवाया करते है।इसीलिए किसान लोग धान या काटी गई फसल के ढेर के चारो तरफ गोबर घोल कर छिड़कते है ताकि कोई चटिया मटिया चुरा न सके।
मेरे गांव के खेत के खलिहान में भी गोबर पानी छिड़कते देखा करता था और दादाजी से पूछता था तो बताते थे कि इससे कोई देवता धान नही चुरा पाएगा।
चटिया मटिया कांवर लेकर जाया करते है और छोटे से कांवर में सैकड़ों किलो अनाज धान आदि उठाकर ले आते है
पास के एक छोटे शहर  चारामा में एक मेडिकल स्टोर वाला परेशान था कि उसकी अलमारी में बंद संभाल कर रखे हुए पैसे नोट वगैरह भी गायब हो जाते थे।जमा धन नकदी के गायब होने से चिंता में रहता था।क्योंकि न अलमारी खुली न चाबी किसी और को दिया न तोड़ा गया फिर भी गायब।
फिर रवेली वाले महाराज ने घर बंधन किया तब जाकर ये सिलसिला रुका।पता चला us mohalle के एक घर में मटिया नमक बाल प्रेत पाला हुआ है वही रात को आकर पैसे चुरा ले जाता है।मुझे पता चला तो मैं सीधे मेडिकल स्टोर वाले से पूछा तो उसने भी सत्य होने की बात स्वीकारी।
खैर एक सोने चांदी का धंधा करने वाले व्यापारी के यहां डौंडी वाले सर और मैं गए थे हमारे ही मोहल्ले में तो जांच करने के बाद डौंडी वाले सर बताए की इसके यहां चटिया/मटिया यानी बाल प्रेत आता है पीछे वाले घर में पाला गया है वही आकर इसे कंगाल कर रहा है।मैं जानता था कि इस व्यापारी की माली हालत आजकल बहुत खराब चल रही है।पीछे वाले घर को भी जानता था क्योंकि पीछे वाला घर मेरे ही एक गुरुजी का था जिन्होंने पहली क्लास का ट्यूशन पढ़ाया था मुझे।और गुरुजी का पुत्र मेरा मित्र भी था ।उनके यहां मैं खेलने भी जाया करता था।उनकी बाड़ी में एक स्थान छोटा सा कोने में बना था जिधर जाने को हमे मना किया जाता था कि उधर देवता रहता है मत जाना। मै उत्सुकता से us स्थान को दूर से देखता था। खैर डौंडी वाले सर ने अपना प्रयोग किया और आटे में उसे कैद किया।काले रंग के ब्रश के रेशों का गुच्छा जैसा।फिर उसे जलाकर नष्ट किया और बाल्टी में लेजाकर निर्देशा नुसार पास की नदी में गड्ढा खोदकर गड़ा दिया।
दूसरे दिन गुरु माता यानी मेरे मित्र की माता मोहल्ले में कहीं दूर जाने निकली फिर वापस आते हुए मेरे ही घर पहुंच गई और मिलने का बहाना कर बैठ गई।मेरी मां ने आने का कारण पूछा तो उसने जवाब दिया कि मन्नी (मेरी बड़ी बहन का घर का नाम)आई है या नहीं यह जानने आई हूं ताकि मिल सकूं।वह बार बार मुझे देखती थी।शायद उसे पता चल गया था कि दौंडी वाले सर को us व्यापारी के यहां मैं ही लेकर गया था और मटिया को मैं ही गड़ा कर आया था जलाने के बाद।उसके फिजूल का  बहाना बनाकर मेरे घर आने का प्रयोजन मैं समझ चुका था।यही प्रमाण भी था की कुछ न कुछ प्रभाव पड़ा है इस गुरु माता पर।इसीलिए मुझे बार२ देखती थी

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