नज़र सचमुच लगती है भई !!!!

हम पढ़े लिखे लोग अपने आप को किसी वैज्ञानिक से कम नहीं मानते ! भले ही विज्ञान का दो प्रतिशत ही ज्ञान हो , अपने को आधुनिक (पिछड़ा नहीं ) मानते हुए जिन बातो का ज्ञान नहीं, जिसे कभी देखा नहीं , जिसे लेबोरटरी में परखा नहीं जा सकता ,जो दिखता नहीं , उसे नकारते है। इसमे आपका दोष नहीं , वातावरण का या प्रचारित बातो/शिक्षा का दोष है। मैं भी ऐसा ही मानता था एक समय , पर समय और जीवन के अनुभव ने मेरी आँखे खोल कर रख दी इसीलिये अपने अनुभव इंटरनेट पर दे रहा हूँ ताकि लोग इन सबसे सावधान रहे।
बचपन से देखता आया कि कुछ बड़े बूढ़े , बच्चो के मामले में अक्सर जब वह दूध नहीं पीता , हमेशा रोते रहता है जैसे उसकी तबियत कुछ खराब लगाती हो तो , कहते है उसे नजर लग गयी। जब मै बच्चो का बाप बना तो अपने पुत्र पर भी ऐसे ही देखा। ऐसे में वृद्ध लोग मिर्ची का धुंआ , फिटकरी घुमाकर जलाना , एक तेल में भीगी रुई की बत्ती जलाकर उतारना आदि प्रयोग करते थे। मेरी समय और बेटे के समय मेरे मन में विचार आया कि नजर सचमुच होती है भी या नहीं इसकी जांच करनी चाहिए। मैंने सोंचा कि मै तो विज्ञान का छात्र रहा हूँ , मैंने रसायन शास्त्र पढ़ा है , फिटकरी तो कीटाणु नाशक है , मिर्ची भी सूक्ष्म जीवो को मारती है जैसे पेट के कीड़े। अत: इनका प्रयोग प्रमाणिक नहीं। मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी नहीं होना चाहिए। अत: मैंने एक यंत्र प्रयोग का निश्चय किया जो यंत्र-मन्त्र की किताबो में दिया गया है। अब मेरे बच्चो को नजर लगाने पर मैंने एक यंत्र काली स्याही से बनाकर सर पर से घुमाकर उतारा और जला दिया। आश्चर्य बच्चे ने कुछ देर बाद रोना बंद कर पहले की तरह दूध पीना और खेलना सभी शुरू कर दिया। जबकि पहले डाक्टरो की दवाइया भी असफल हो जाती थी ! अब एक प्रयोग से तो प्रमाणित नहीं होता , अत: जब भी नजर जैसी बात होती हर बार मैंने यंत्र प्रयोग करके देखा , हर बार मैंने असर होते देखा ! अंतत : मैंने स्वीकार किया कि सचमुच नजर जैसी चीजे होती है। इसका अस्तित्व है। हर प्रयोग के बाद मैं खुद उसमे कमी ढूंढा करता, आलोचना किया करता , और हर अंधविश्वास की सम्भावना ढूंढा करता।
उन दिनों मेरी दूकान भी थी, रेडीमेड कपडे की . मैंने दूकान पर भी नजर लगने की बात सुनी थी। उसके लिए व्यापारी लोग निम्बू मिर्ची लटकाते थे। दुकान पर नजर लगने से ग्राहकी बंद सी हो जाती है। ऐसा मैंने भी होते देखा तो मैंने भी नींबू मिर्ची टांग कर देखा , सचमुच ग्राहको की भीड़ पुन: चालु हो जाती थी , ऐसा करने के पहले दूकान में खाली बैठना पडता था। इसका परीक्षण मैंने बार बार किया और सही पाया।
इसके बाद मै नौकरी के सिलसिले में बाहर निकल आया। एक बार ओ गजब हो गया। मेरे रिश्तेदारी की महिलाये मेरे घर मिलने आयी , उनमे से एक का स्वास्थय करीब एक हप्ते से खराब थी। दवा वगैरह असर नहीं कर रही थी। देखने में कुछ भयानक शकल की लगती थी . अतः मैंने मजाक में कहा कि आपको नजर लगी होगी , बाकी लोग तो मुस्कुराने लगे उन्हें मेरा व्यंग समझ में आ गया था। परन्तु वह महिला ने गम्भीरता से लिया वाकई उसे नजर लगी होगी क्योकि नजर के लक्षण वैसे ही होते है . इसी बीच मेरी पत्नी के मुंह से निकल गया कि हमारे घर में बच्चो को नजर लगती है तो ये ही उतार लेते है। अब वो महिला मेरे पीछे पड़ गयी - लो न फूफाजी , मेरी नजर उतार दो। मैंने लाख कोशिश की टालने की वो तो बच्चो के लिए है , ये अंधविश्वास है आदि . पर बात नहीं बनी। मैंने यंत्र प्रयोग किया , और थोड़ा आराम करने कह फैक्ट्री ड्यूटी पर चला गया। १०-१५ मिनट में वह महिला स्वस्थ हो गयी। मुझे पता लगने पर मेरे भी आश्चर्य का ठिकाना न
रहा ! उधर मायके जाकर उसने मेरी बड़ाई क्या की , तीसरे दिन उसकी भाभी भी पहुँच गयी "झाड़ा " लेने के लिए। अब मेरी मुसीबत बढ़ गयी मैंने उसे टरकाने की हरसंभव कोशिश की , कि ये अंधविश्वास है, मुझे कुछ नहीं आता , मैंने तो "नाटक" किया था, आदि। पर बात नहीं बनी , हारकर मैंने उसे भी यंत्र और मन्त्र का झाड़ा दे दिया। वापस वो चली गयी , न जाने आगे क्या हुआ शायद उसकी परेशानी दूर हो गयी, तो दो दिनों बाद देवर (साढू का पुत्र ) पहुँच गया। मेरी मुसीबते बढती जा रही थी , जिस व्यक्ति के हजारो पहचान हो उसके साथ चमत्कार हो जाए तो आगे भीड़ लग जायेगी !! पूरे धमतरी जैन समाज के लोग लाइन लगा देंगे और मेरे आफिस/नौकरी आदि में बाधा हो जायेगी, इसलिए मैंने निश्चय किया कि चाहे कुछ भी हो जाए इसे झाड़ा नहीं दूंगा , वरना मेरी आज़ादी खतरे में पड़ जायेगी। मैंने ऐसा ही किया , और उसे एक ग्रामीण झाड़ फूंक करने वाले के पास टिका दिया। पर इन प्रयोगो से नजर लगाने वाली बात सत्य साबित हुई। और मै इस पर अब विश्वास करता हूँ।
आगे जाकर मुझे घमंड हो गया कि नजर तो कमजोर इच्छा शक्ति वालो को ही लगती है .अतः मुझे नहीं लग सकती और मै ठहरा एक साधक , मुझ पर सम्भव नहीं। मुझे भी नजर लगी दो एक बार ! मेरा मन मानने को नहीं तैयार था। पर शंकाग्रस्त होकर दो तीन दिन बाद अपनी पत्नी की सहायता से खुद पर यंत्र प्रयोग करवाया , तो वाकई १०-१५ मिनट में ठीक हो गया। अब मै हतप्रभ हो गया , मेरा घमंड चूर चूर हो गया। कमबख्त मुझे भी लग ही गया। ऐसा कई बार घटित हुआ मेरे साथ ।
पाठकगणों इससे सावधान रहने में ही भलाई है , नजर सचमुच होती हैं अंधविश्वास नहीं !
लर वह तरीका बता सकते हैं ?आपकी अति क्रपा रहेगी ..
जवाब देंहटाएंहमारे घर पर ८-१० सालों से रिश्तेदार तंत्र कर रहे हैं...
Parantu Saavdhan, there are Many Fraud Persons !
हटाएंKisi Tantrik se Sampark kare
जवाब देंहटाएंsahi hai sir, I agree.
जवाब देंहटाएंIt is the conclusion of my experiments again and again, just to know the Fact
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